Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संयम

क्रोध, हर्ष, गर्व, लज्जा, उद्दण्डता तथा अपने को पूज्य समझना; ये भाव जिसको पुरुषार्थ से भ्रष्ट नहीं करते वही पण्डित कहलाता है।

Anger, elation, pride, shame, insolence, and thinking oneself worthy of worship — the one whom these emotions cannot deflect from right effort is called truly wise.

— आराध्य सूत्र · #1422

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मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथी है और इन्द्रियाँ इसके घोड़े हैं। इसको वश में करके साधना करने वाला चतुर एवं धीर पुरुष काबू में किए हुए घोड़ों से सारथी की भाँति सुखपूर्वक यात्रा करता है।
संयम