Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 16

लड़के व्यसन में-परिवार टेंशन में

258 सूत्र · पृष्ठ 4 / 5

यह भी बुद्धिमानी का एक काम है कि मनुष्य लोक रीति के अनुसार व्यवहार करें।
विवेक
तुम्हारे पास कितना धन है इस बात का विचार रखो और उसके अनुसार ही तुम दान दक्षिणा दो, योग क्षेम की बस यही रीति है।
दान
अपना मूल्य समझो और विश्वास करो कि आप संसार में महत्त्वपूर्ण व्यक्ति हो।
चरित्र
शालीनता बिना मोल मिलती है और उससे सब कुछ खरीदा जा सकता है।
चरित्र
क्रोध में जवाब ना दो, अधिक खुशी में वादा न करो, दुःखी मन से फैसला न करो।
विवेक
बदला लेने में क्या मजा, मजा तो तब है जब सामने वाले को बदल डालो।
क्षमा
उद्यम, साहस, धैर्य, बल, बुद्धि और पराक्रम की देव भी सेवा करते हैं।
पुरुषार्थ
भविष्य का भय न करने वाला ही वर्तमान का आनंद ले सकता है।
मन
सफल मनुष्य बनने से बेहतर है गुणी मनुष्य बनने का प्रयास करें।
चरित्र
दूसरों को सुधारने का अहं पालने की अपेक्षा अच्छा है स्वयं को सुधारना।
विनम्रता
जो उपहास, व्यंग और विरोध से नहीं डरता वे ही बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।
पुरुषार्थ
प्रायः समान विद्या वाले लोग एक दूसरे के यश से ईर्ष्या करते हैं। ईर्ष्या विवेक की विरोधी है।
विवेक
स्पर्धा संसार में गुणी, प्रतिष्ठित और सुखी लोगों की संख्या में बढ़ती करना चाहती है और ईर्ष्या इनकी कमी करना चाहती है।
चरित्र
दूसरों को गुलाम बनाने वाला खुद गुलाम बन जाता है।
चरित्र
आदमी झूठी प्रशंसा सुन सकता है पर सच्ची आलोचना नहीं सुन पाता है। आपकी मानसिकता सशक्त किन्तु मृदु होना चाहिए।
विनम्रता
लोक में उदासीन वृत्ति से जीने वाले कभी दुःखी नहीं होते।
अनासक्ति
आपके आगे-पीछे क्या है इसका नहीं अंदर क्या है इसका महत्त्व है।
चरित्र
मत बनिये खुदा किसी के वास्ते, आदमी बन जाइये आदमी के वास्ते।
विनम्रता
अहं झुका तो सारे गुण ऊँचे उठ जायेंगे, अहं और इन्द्रिय दर्प विवेक को नष्ट कर देते हैं।
विनम्रता
बड़ा आदमी बनना अच्छी बात है पर अच्छा आदमी बनना बड़ी बात है।
चरित्र
रोग होने पर पथ्य सेवन, स्वामी के सामने सत्य बोलना, दुष्ट के साथ न्याय करना, शत्रु को क्षमा करना, ज्ञान होने पर ध्यान करना, धन होने पर दान करना और स्त्री के साथ कोमल व्यवहार करना औषध है।
चरित्र
आँख खुले तो जिनदेव को देखना एवं आँख बंद हो तो निजदेव को देखना चाहिए।
भक्ति
आँखें ही साधना की सिद्धि कर देती हैं और आँखें ही साधना का नाश करती हैं।
संयम
जिसके परिणाम विशुद्ध होते हैं उसकी आँखें और चेहरा चमकता है और जिसका मन विकृत है उसकी भाषा और देह विकृत हो जाती है।
मन
बड़ी-बड़ी बातें करने से नहीं छोटी-छोटी कमियाँ दूर करने से समझदार कहलाते हैं।
चरित्र
शाकाहार से शक्ति उत्पन्न होती है मांसाहार से उत्तेजना बढ़ती है।
आहार
मनुष्य की भलाइयों को देखें और फिर उसकी बुराइयों पर दृष्टि डालें इन में जो अधिक हैं, बस समझ लो वैसा ही उसका स्वभाव है।
चरित्र
कौआ अपने भाइयों से अपने भोजन को स्वार्थ से छिपाता नहीं है, बल्कि प्यार से उन्हें बुलाकर खाता है, ऐश्वर्य ऐसी ही प्रकृति के लोगों के साथ रहता है।
दान
यदि उदासी का कारण हटा दिया जाये तो सम्बन्धी का मन मुटाव दूर हो जाता है एवं वह पास में आ जाता है।
परिवार
चंचल मन वाला खोटा पुरुष सोचकर ठीक रीति निकाल भी ले पर उसे व्यवहारिक रूप देते हुए डगमगाता है और अपने अभिप्राय को कभी पूरा नहीं कर पाता है।
मन
मित्रता द्वारा मनुष्य को सफलता मिलती है किन्तु आचरण की पवित्रता उसकी प्रत्येक इच्छा को पूर्ण कर देती है।
चरित्र
भले आदमी जिन बातों को बुरा बतलाते हैं, मनुष्य को चाहिए कि माता की रक्षा के लिए भी उन्हें न करें।
चरित्र
सम्यक्त्व चारित्र से सहित एक दिन भी जीवित रहना श्रेष्ठ है लेकिन चारित्र से हीन सौ करोड़ वर्ष भी जीवित रहना व्यर्थ है।
चरित्र
जिस सच्चारित्र को हीन शक्ति वाला जीव आचरण करता है, उसे उत्कृष्ट शक्ति वाले की अपेक्षा हजार गुना फल ज्यादा प्राप्त होता है।
चरित्र
चारित्र के आसन पर आसीन प्राणी जिस वस्तु की आकांक्षा करता है तीनों लोकों में उसे वह प्राप्त होती है और वह तीन जगत् का स्वामी होता है।
चरित्र
चारित्र से विचलित जीव जीवित रहता हुआ भी मृत के समान है लेकिन चारित्र से युक्त जीव मृत होकर भी इहलोक-परलोक में जीवित है।
चरित्र
जिन लोगों में चरित्र के निर्माण करने की शक्ति नहीं होती है उन्होंने अन्य दिशाओं में चाहे कितनी ही महत्ता प्राप्त कर ली हो संसार उसकी कुछ परवाह नहीं करता है।
चरित्र
कुलीन पुरुष को करोड़ों रुपये मिलें तब भी वह अपने नाम को कलंकित नहीं होने देता है। प्रतिष्ठित कुल में उत्पन्न हुए मनुष्य के दोष पर चन्द्रमा के कलंक की तरह विशेष रूप से सबकी दृष्टि पड़ती है।
चरित्र
कुलीन मनुष्य के मुख से यदि फूहड़ और निकम्मी बातें निकलेंगी तो लोग उसके जन्म के विषय तक में शंका करने लगेंगे।
वाणी
पर्वत के समान उच्च प्रभावशाली लोग भी बहुत क्षुद्र दिखाई पड़ने लगेंगे यदि वे कोई दुष्कर्म करेंगे, फिर चाहे वह कर्म गोली के समान ही छोटा क्यों न हो।
चरित्र
छोटे आदमियों के बीच का ही यह विशेष दोष है; जो वे महान् पुरुषों की प्रतिष्ठा, उनकी कृपा दृष्टि और अनुग्रह को प्राप्त करने की चेष्टा नहीं करते हैं।
चरित्र
साख है तो सब कुछ खास है, साख नहीं तो सब राख है।
चरित्र
जीते जी कद्र करो, अर्थी उठाते वक्त तो नफरत करने वाले भी रो पढ़ते हैं।
चरित्र
इन्द्रिय निरोध तभी संभव है जब मन वश में हो।
संयम
कर्म कलंक तो छूट जाते हैं पर अपयश का कलंक नहीं छूटता है।
चरित्र
कलंक के रसगुल्लों से ईमानदारी की सूखी रोटी अच्छी है।
सत्य
परिवर्तन से डरना और संघर्ष से कतराना मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी है।
पुरुषार्थ
हर किसी को सुखी रखना हमारे वश में नहीं, लेकिन किसी को हमारी वजह से दुःख न हो ये हमारे वश में हैं।
अहिंसा
अपनी गलती को तुरन्त स्वीकार कर लेना और दूसरों की गलती को नजर अंदाज कर देना ही सकारात्मक सोच की दिशा का पहला कदम है।
विनम्रता
यह सच है कि छोटा आदमी बड़े मौके पर काम आता है और बड़ा आदमी छोटी-सी बात पर औकात दिखा जाता है।
चरित्र
गुणग्राह्य दृष्टि व्यक्ति को श्रेष्ठता प्रदान करती है।
विवेक
गुणी लोग दोषों को भी गुण रूप से ग्रहण करते हैं और दोषी लोग गुणों को भी दोष रूप से ग्रहण करते हैं।
चरित्र
जो दूसरों से सबक लेकर चेत जाता है, वही चतुर होता है।
विवेक
चित्त की पवित्रता से चारित्र में पवित्रता आती है। चरित्रवान के साथ दुनिया होती है।
चरित्र
अपरिग्रही अनगार को जो आनंद होता है वह अहमिन्द्र को भी नहीं होता। चक्रवर्ती को उसके अनंतवें भाग भी नहीं होता।
अनासक्ति
मानस की सबसे बड़ी आवश्यकता शिक्षा नहीं चारित्र है क्योंकि यही सबसे बड़ा रक्षक है। चारित्र के बिना व्यक्तित्व खोखला है।
चरित्र
श्रावक अभिषेक के समय प्रभु के और आहार दान के समय गुरु के अति निकट होता है, तब दो बासों के घर्षण के समान भक्ति व चारित्र की ज्योति प्रकट होती है।
भक्ति
छोटे-छोटे प्रलोभनों का आकर्षण चारित्र को गिरा देता है।
चरित्र
चारित्र जीवन में शासन करने वाला तत्त्व है और वह प्रतिभा से उच्च है। चारित्र की तलवार के साथ वैराग्य की ढाल होना परमावश्यक है।
चरित्र
जिसका चारित्र शुद्ध है उसकी समाधि भी श्रेष्ठ होती है।
चरित्र