Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

श्रावक अभिषेक के समय प्रभु के और आहार दान के समय गुरु के अति निकट होता है, तब दो बासों के घर्षण के समान भक्ति व चारित्र की ज्योति प्रकट होती है।

A layman is very close to the Lord at the time of the anointment ceremony and to the guru at the time of offering food; then, like the friction of two bamboos, the flame of devotion and character is kindled.

— आराध्य सूत्र · #1676

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति