Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 49

सोना बना लो या सोने में गुजार दो

77 सूत्र · पृष्ठ 2 / 2

संसार में साहस ही सब कुछ है, साहस गया तो सब कुछ गया।
चरित्र
यदि आप किसी को सुधारना चाहते हो तो पहले स्वयं को सुधारना होगा।
चरित्र
श्रम करने वालों के जीवन में उदासी और निराशा का कोई स्थान नहीं रहता है और वे ही समाज में स्वतंत्रता, समता, बन्धुता विकसित करते हैं।
पुरुषार्थ
श्रम से ही कृषि से लेकर उद्योगों तक उन्नति हुई और समुद्र की गहराइयों से लेकर अन्तरिक्ष की ऊँचाईयों तक व्यक्ति पहुँचा है।
पुरुषार्थ
श्रम से पराधीनता कम हो जाती है और आत्म विश्वास जागता है।
पुरुषार्थ
श्रम से व्यक्तिगत जीवन में उन्नति होती है एवं जीवन स्तर ऊँचा उठता है।
पुरुषार्थ
अपनी शक्ति को छोटा न समझें, एक छोटी-सी चिंगारी भी विशाल वन को जलाकर राख कर सकती है। आत्मशक्ति भोग से नहीं योग से प्राप्त होती है।
पुरुषार्थ
मणि मंत्र और औषधि का प्रभाव अचिन्त्य होता है।
णमोकार
उपदेशक बनने से पहले स्वयं आस्थावान होना आवश्यक है।
चरित्र
विनीत व्यक्ति का कोई शत्रु नहीं होता है।
विनम्रता
आत्मानुशासक, अनुशासन प्रिय ही दूसरों पर अनुशासन कर सकता है।
संयम
हार और जीत हमारी सोच पर निर्भर है, मान लिया तो हार ठान लिया तो जीत।
मन
मुकाम वो चाहिए कि जिस दिन हार भी जाऊँ तो उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेरे चर्चे हों। हार तो कभी होती नहीं या तो जीत मिलती या सीख मिलती।
समृद्धि
जीत निश्चित हो तो कायर भी लड़ सकता है, बहादुर तो वो कहलाता है, जो हार निश्चित होने पर भी मैदान नहीं छोड़ता है।
चरित्र
इंसान होकर हम हार क्यों मानें जब बहती नदी ने आज तक नहीं पूछा कि समुद्र कितनी दूर है।
पुरुषार्थ
पराजय तब नहीं होती जब आप गिर जाते हैं, पराजय तब होती है जब आप उठने से इंकार कर देते हैं। जो झिझकता है वह हारता है।
पुरुषार्थ
जो मनुष्य रोग, क्लेश, मद, उन्माद तथा समस्त दुःखदायक परीषहों से पीड़ित होने पर भी स्वीकृत चारित्र को नहीं छोड़ते हैं वे स्तुत्य हैं।
चरित्र