Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धन

धन के उपार्जन में दुःख, उपार्जित धन की रक्षा करने में दुःख, दान में दुःख और खर्च में दुःख इस प्रकार दुःख के कारण धन को धिक्कार हो।

Sorrow in earning wealth, sorrow in guarding it, sorrow in giving it away, and sorrow in spending it — because it is thus a cause of sorrow, shame upon wealth.

— आराध्य सूत्र · #2069

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लक्ष्मी हिंडोले की तरह चंचल है। विषयों से उत्पन्न हुआ सुख अंततः दुःखप्रद है। देह विपत्ति का घर है। अत्यधिक धन मृत्यु का प्रचुर साधन है। संसार अत्यधिक शोकपूर्ण है। स्त्रियाँ अनर्थ की जड़ हैं। फिर भी लोग इस घोर संसार में ही रत रहते हैं। आत्मा में रत नहीं होते यह आश्चर्य है।
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