Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

जो अत्यन्त कुपित होने पर भी दुर्वचन नहीं बोलता वह समस्त पृथ्वी पर श्रेष्ठ धर्मात्मा है।

One who speaks no ill words even when greatly enraged is the finest religious soul on all the earth.

— आराध्य सूत्र · #6491

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा