Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

परेशानी में एकदम प्रतिक्रिया न करें- उत्तेजित अवस्था में मन की विवेक शक्ति नष्ट हो जाती है, लोगों के माँगने पर ही अपनी सफाई दीजिए, अपने निर्दोष होने को लोगों पर थोपिये नहीं, सलाह या उत्तर देते समय आपकी आवाज हमेशा नम्र, आदर पूर्ण और नियन्त्रित होनी चाहिए, आपकी चाहे कितनी भी आलोचना की जाए या दोष लगाया जाय, आपको कभी अनियन्त्रित तरीके से व्यवहार नहीं करना चाहिए और जबाव देते समय कभी चीखना या चिल्लाना नहीं चाहिए।

Do not react at once in trouble: in an agitated state the mind's power of discernment is destroyed. Offer your explanation only when people ask for it; do not force your innocence upon others. When giving advice or an answer, your voice should always be gentle, respectful and controlled. However much you are criticised or blamed, you must never behave in an uncontrolled manner, and when replying you must never scream or shout.

— आराध्य सूत्र · #1

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा