Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

किसी के मुख से कोई बात अपने विरुद्ध सुनकर उसे अपना विरोधी मत मानों बल्कि विरोध का कारण ढूँढ़ों और उसे मिटाने की सच्चे हृदय से चेष्टा करो।

On hearing something against yourself from someone, do not treat him as your foe; instead seek the cause of the opposition and sincerely strive to remove it.

— आराध्य सूत्र · #3514

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा