Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

शत्रु कौन होता है? आप जो चाहते है वो मिलता रहे तब तो ठीक, आपने जो चाहा नहीं हुआ, जिससे चाहा नहीं किया, जैसा चाहा नहीं किया, बस वही शत्रु बन गया, शत्रु कोई वस्तु नहीं सिर्फ कल्पना है। 'शरीर की रक्षा करना पर अशरीरी होने के लिए'।

Who is an enemy? As long as you keep getting what you want, all is well; but the moment what you wished did not happen, or the one you wished from did not comply, or things did not go as you wished, that very one becomes your enemy. An enemy is not a thing but merely an imagination. 'Protect the body, but for the sake of becoming bodiless.'

— आराध्य सूत्र · #5490

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा