Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

क्रोध एक ऐसी अदृश्य ज्वाला है जिसके अङ्गारों में मनुष्य भीतर ही भीतर सुलगता रहता है, और अपने अद्वितीय व्यक्तित्व को वह अनुपयोगी राख के ढेर में परिवर्तित कर लेता है।

Anger is an invisible flame in whose embers a person smoulders within, turning his unique personality into a heap of useless ash.

— आराध्य सूत्र · #26

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा