Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

अति प्रिय मनुष्य भी क्रोध करने से शत्रु बन जाते हैं, अयोग्य कार्य से यश भी अपयश रूप परिणमन कर जाता है।

Even a most beloved person becomes an enemy by giving way to anger, and through an unworthy act even fame turns into disgrace.

— आराध्य सूत्र · #43

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा