Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
क्षमा

सहनशीलता का विकास कीजिये- सहनशीलता सबसे महान गुण है, अपने प्रति कठोर बनें जबकि दूसरों के दोषों तथा कमियों के प्रति उदार, दूसरों के अपराधों को भूलने और क्षमा करने से मन और चेतना शक्तिशाली और शुद्ध बनती है, एक सहनशील व्यक्ति सभी सीमाओं को पार कर किसी भी ऊँचाई पर पहुँच सकता है।

Cultivate tolerance - tolerance is the greatest virtue. Be strict with yourself but generous toward others' faults and shortcomings; forgetting and forgiving others' offences makes the mind and consciousness strong and pure. A tolerant person can cross all limits and reach any height.

— आराध्य सूत्र · #16

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कोई भी प्राणी तुम्हारे द्वारा तिरस्कार के योग्य नहीं है, ये तो सब स्वतन्त्र पदार्थ हैं, इनसे तेरा सम्बन्ध क्या है? अपने क्रोध–मान–माया–लोभ का तिरस्कार तेजी से करो, इन्हीं कषायों ने तुझे भटका रखा है और दुःखी कर रखा है।
क्षमा