Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 43

पुरुष हो, पुरुषार्थ करो

162 सूत्र · पृष्ठ 2 / 3

बेहतर बनने के किसी भी अवसर को हाथ से न जाने दो।
पुरुषार्थ
अपने कल्याण के इच्छुक व्यक्ति को कभी स्वेच्छाचारी नहीं होना चाहिए।
संयम
इतना ऊँचा उड़ने की कोशिश मत करो कि अंत में थककर पाताल में गिरना पड़े, उतना ही उड़ो, जितनी तुम्हारे अंदर शक्ति है।
विवेक
व्यस्त होना ही पर्याप्त नहीं है सवाल यह है कि हम किस चीज में व्यस्त हैं।
विवेक
गुलाब की तरह महकना है, तो पहले चिराग की तरह जलना पड़ेगा।
पुरुषार्थ
प्रतिकूलता में क्रोध और अनुकूलता में मान उत्पन्न होता है।
क्षमा
दूसरों के सहारे (बैसाखियों से) चलने वाला मंजिल नहीं पा सकता है।
संयम
आवेश शान्त होने पर जो काम किया जाता है, वही फलदायी होता है।
क्षमा
प्रतिमा को देखकर अपनी प्रतिभा को जगाएँ।
भक्ति
गुणों से ही मनुष्य गौरव को प्राप्त होता है।
चरित्र
हमें अपने आपको नहीं, अपने उत्तरदायित्वों को गंभीरता से लेना चाहिए।
विनम्रता
असफलताओं के अनुभव के बिना सफलता का लाभ नहीं उठाया जा सकता है।
समृद्धि
मनुष्य का जीवन अनुभवों का शास्त्र है जिसका प्रत्येक अध्याय मार्गदर्शक है। अनुभव अमूल्य कसौटी है।
ज्ञान
कष्ट सहने पर ही अनुभव होता है।
ज्ञान
अपने कार्य को इतनी लगन से कीजिए कि असफलता असम्भव हो जाए।
पुरुषार्थ
एक बार की असफलता आधी विजय है क्योंकि अभ्यास आदमी को पूर्ण बनाता है।
पुरुषार्थ
असफलता से मत घबराइये, आखिर बिना गिरे क्या कोई चलना सीख लेता है?
पुरुषार्थ
कटुता, अपमान और दण्डों की मार की अपेक्षा प्रेम, स्नेह वात्सल्य से किया गया हृदय परिवर्तन स्थाई होता है।
चरित्र
जिन कार्यों के करने में आकुलता होती है वे कभी मत करो चाहे वे शुभ हो या अशुभ।
मन
आचरण ही हमें साधु और शैतान में अन्तर बोध कराता है।
चरित्र
कितना चले ये महत्त्वपूर्ण नहीं, कहाँ पहुँचे यह महत्त्वपूर्ण है। कितना सुना यह महत्त्वपूर्ण नहीं, कितना आचरण में उतरा यह महत्त्वपूर्ण है।
चरित्र
प्रमाद की स्थिति सोने (शयन) के बराबर है।
पुरुषार्थ
आचरणवान कुरूप व्यक्ति सुन्दर व्यक्ति से श्रेष्ठ है।
चरित्र
तप एवं सदाचार के प्रभाव से निम्नस्तर व्यक्ति भी उच्च स्थान प्राप्त कर लेते हैं।
चरित्र
आपको बातों के बादशाह नहीं, आचरण के आचार्य बनना चाहिए।
चरित्र
आज राम की जय जयकार तो सभी करते हैं, लेकिन राम के आचरण को कोई नहीं पालना चाहते हैं।
चरित्र
सदाचरण ही सुख शान्ति-समृद्धि-सम्पत्ति के बीज बोता है।
चरित्र
आचारहीन ज्ञान नष्ट हो जाता है और ज्ञानहीन आचार जैसे वन में अग्नि लगने पर पंगु उसे देखता हुआ और अंधा दौड़ता हुआ भी आग से बच नहीं पाता, जलकर नष्ट हो जाता है।
ज्ञान
शब्दों में अतिशयोक्ति व न्यूनता हो सकती है, आचरण में नहीं होना चाहिए।
चरित्र
कठिनाइयों से घबराकर कभी अपना आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए।
पुरुषार्थ
असंभव को संभव कर दिखाने और पर्वतों को भी हिला देने की शक्ति सिर्फ दृढ़ संकल्प व आत्म विश्वास से ही आती है।
पुरुषार्थ
उम्मीदों को मत छोड़िये यही जीने का सबसे बड़ा सहारा है।
पुरुषार्थ
आपत्तियों पर विजय पाना जीवन का सबसे बड़ा आनंद है।
पुरुषार्थ
पवित्रता की राह ही आनंद की राह है।
चरित्र
तू विशाल संसार-सागर तैर चुका अब किनारे आकर क्यों अटक रहा है, उस पार पहुँचने के लिए पूरी शक्ति से शीघ्रता कर। हे साधक! क्षण-मात्र भी प्रमाद न कर।
पुरुषार्थ
आशावादी से पूछो तो वह कहता है–दो दिनों के बीच में एक रात होती है और निराशावादी कहता है दो रातों के बीच में एक दिन होता है।
मन
आशावादी हर कठिनाई में अवसर देखता है पर निराशावादी प्रत्येक अवसर में कठिनाइयाँ ही खोजता है।
मन
आशा को अपनी सहेली और उत्साह को अपना मित्र बनाइये क्योंकि यही सफलता के साथी हैं।
समृद्धि
क्षुधा से बढ़कर कोई रोग नहीं है और अन्न से बढ़कर कोई दूसरी औषधि नहीं है।
स्वास्थ्य
जो अपने प्रति वफादार नहीं है, वह दूसरों के प्रति क्या वफादार होगा?
चरित्र
ईमानदार होना अपने लिए ही नहीं दूसरों के लिए भी लाभदायक होता है।
चरित्र
ईमानदार होना इस तरह गर्व करने की बात है जैसे हजारों की भीड़ में से आपको चुन लिया हो।
चरित्र
बड़प्पन अमीरी में नहीं किन्तु ईमानदारी और सज्जनता में है।
चरित्र
यदि आप ईमानदार हैं तो चिन्ता न करें, सोना आग में जलकर ही कुंदन बनता है।
चरित्र
ईमानदारी इज्जत से बड़ी है।
चरित्र
सच्चाई और ईमानदारी से प्रेरित संघर्ष ही स्थाई प्रगति का आधार है।
सत्य
सच्चा इंसान वही है जो किसी से ईर्ष्या नहीं रखता है।
चरित्र
सच्चा पुरुषार्थी वही है जो बार-बार असफल रहने पर भी अपने प्रयत्न में शिथिलता नहीं आने देता और असफलता के बाद नए उत्साह से सफलता के लिए उद्यम करने लगता है।
पुरुषार्थ
यह मानना कि वर्तमान समय खराब है, जीवन का बहुत बड़ा भ्रम है, अरे! अपने हृदय पर अंकित करो कि प्रत्येक समय वर्ष का सर्वोत्तम दिन है।
समय
मानव जीवन में लगन बड़ी महत्त्व की वस्तु है जिसमें लगन है, वह बूढ़ा भी जवान है जिसमें लगन नहीं, वह जवान भी मृतक है।
पुरुषार्थ
उदासीन और उत्साहहीन व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर पाता है।
पुरुषार्थ
उत्साहहीनता एक ऐसा भयानक रोग है, जिससे आपका मस्तिष्क विषमय होकर अपनी योग्यता का नाश कर बैठता है।
पुरुषार्थ
उदारता पापों को ऐसे बदल देती है, जैसे पारस पत्थर लोहे को छूते ही बदल देता है।
दान
वही उन्नति कर सकता है जो स्वयं को उपदेश देता है।
संयम
यह मानना कि हम कुछ नहीं कर सकते, सबसे बड़ी कायरता है, इसे त्यागो और पुरुषार्थ को जागृत करो, फिर देखोगे कि तुम्हारी उन्नति तुम्हारे हाथ में है।
पुरुषार्थ
अपने दिमाग का उपयोग करते रहिए वरना आप मानसिक तौर पर आलसी हो जायेंगे।
मन
एक बुद्धिमान आदमी अपने दुश्मन का भी बेहतर उपयोग कर सकता है, जबकि मूर्ख अपने मित्र तक का भी उपयोग नहीं कर पाता है।
ज्ञान
कर्त्तव्य शील को सदा प्रसन्नता रहती है, कर्त्तव्य हीन को सदा खिन्नता रहती है।
चरित्र
प्रत्येक मनुष्य का वास्तविक जीवन-संरक्षक तो उसका कर्त्तव्य ही है।
चरित्र
आपका कोई क्षण ऐसा न निकले, जो कर्त्तव्य से रिक्त हो।
चरित्र