Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 72

पुरुषार्थों का मूल कारण – आरोग्य

122 सूत्र · पृष्ठ 2 / 3

भय से गुर्दे और मूत्राशय को हानि पहुँचती है।
स्वास्थ्य
दुःख दबाने से फेफड़ों और बड़ी आँत की कार्य क्षमता कम होती है।
स्वास्थ्य
अधीरता व क्षणिक आवेश से हृदय व छोटी आँत को हानि पहुँचती है।
स्वास्थ्य
रोग उपचार की बजाय पथ्य पालन ज्यादा हितकर है।
स्वास्थ्य
नकारात्मक विचार बीमारियों को आमंत्रण देते हैं।
स्वास्थ्य
मन में जिस प्रकार के विचार होते हैं शरीर पर उनका वैसा ही प्रभाव होता है।
स्वास्थ्य
युद्ध की अपेक्षा नशे ने मानव जाति को अधिक नुकसान पहुँचाया है।
स्वास्थ्य
व्यसन और फैशन व्यक्ति के पतन का कारण है।
स्वास्थ्य
कुदरत ने आपको हर चीज से निपटने की शक्ति दी है।
स्वास्थ्य
शरीर को रोगी या दुर्बल रखने के समान कोई पाप नहीं है।
स्वास्थ्य
शरीर भले ही कमजोर हो पर मन को कमजोर मत बनाइये।
स्वास्थ्य
शाकाहार मनुष्य को निरोग और दीर्घ जीवी बनाता है।
आहार
जिसके अंतरंग में शान्ति है उसे बाह्य वेदना कभी कष्ट नहीं दे सकती है।
स्वास्थ्य
सदाचारी, श्रद्धावान् और ईर्ष्या रहित मनुष्य सौ वर्ष तक जीवित रहता है चाहे वह सब प्रकार के शुभ लक्षणों से हीन हो।
स्वास्थ्य
कमजोर होना दुःखी होना है।
स्वास्थ्य
तन के स्वस्थ ही नहीं मन के स्वस्थ भी बनो।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य लाभ का इच्छुक कम खाये, कम पीये और कम बोले।
स्वास्थ्य
तमाम शारीरिक तथा मानसिक कार्य व्यायाम में सम्मिलित है।
स्वास्थ्य
तन्दुरुस्ती ठीक न हुई तो दुनिया के सारे सुख बेकार है।
स्वास्थ्य
शरीर के स्वस्थ होने का मतलब है कि मनुष्य का मन भी स्वस्थ है।
स्वास्थ्य
शारीरिक और मानसिक दोनों व्यायाम सीमा के अन्दर ही रहकर करना चाहिए।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन बहुत ही जरूरी है।
स्वास्थ्य
भोजन की मात्रा से नहीं गुणवत्ता से स्वास्थ्य ठीक रहता है।
आहार
स्वस्थ व्यक्ति की पहिचान पैर गरम, पेट नरम, सिर ठंडा।
स्वास्थ्य
सुन्दर स्वास्थ्य परिश्रम के पसीने से प्राप्त होता है।
स्वास्थ्य
व्यक्ति जितना व्यस्त उतना स्वस्थ।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य है तो सब कुछ है, स्वास्थ्य न हो तो कुछ भी नहीं अतः स्वस्थ रहें।
स्वास्थ्य
भोजन के ४० मिनट पहले और एक घंटे बाद पानी पियें, पानी चाय की चुस्की की तरह घूंट-घूंट कर पियें, कभी भी ठंडा पानी न पियें, सुबह उठते ही २-३ गिलास पानी पियें, पानी का सही उपयोग अमृत है गलत उपयोग विष के समान है।
आहार
अन्न नष्ट न हो इसलिए हम इस मानव शरीर का उपयोग कूड़े दान या कचरा पेटी की तरह करते हैं, संतुलित आहार लेना आवश्यक है।
आहार
जितनी कैलोरी शरीर में बन रही है वह प्रतिदिन खर्च होना जरूरी है अन्यथा बची कैलोरी मोटापा बढ़ाती है।
स्वास्थ्य
मानव शरीर का सब बीमारियों से बचने का एक ही सर्वश्रेष्ठ उपचार है आहार पर नियंत्रण। शरीर से ज्यादा चिंता ढाई इंच की जिह्वा की क्यों? हमें खाने की जरूरत है जीने के लिए, लेकिन हम जीते हैं खाने के लिए।
आहार
दिन प्रतिदिन बढ़ रहे रासायनिक खाद कीटनाशक, कलर के जहर से हमें बचना चाहिए।
स्वास्थ्य
अगर हम चाहते हैं कि हमारा शरीर पूरी ईमानदारी से २४ घंटे हमारा साथ दे तो एक घंटा व्यायाम के माध्यम से उसका ख्याल रखना चाहिए।
स्वास्थ्य
योग भारत की सबसे प्राचीन कला है।
स्वास्थ्य
हमारा शरीर जन्म से मृत्यु तक लगातार कार्य करता है और हम मशीन से बढ़कर इसका उपयोग करते हैं।
स्वास्थ्य
हमें शरीर का पूरा ख्याल रखना होगा क्योंकि हमारे शरीर की उपयोगिता बहुत अधिक है।
स्वास्थ्य
शरीर व मन को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार व नियमित व्यायाम जरूरी है।
स्वास्थ्य
जाग्रत मन को पूरे शरीर से तालमेल हेतु प्रत्येक डेढ़ घंटे पश्चात् लगातार कार्य करने पर मस्तिष्क की ग्रहण क्षमता क्षीण हो जाती है इसलिए बीच में विषय बदलना आवश्यक है।
स्वास्थ्य
शरीर का मशीन की तरह लगातार उपयोग न करें।
स्वास्थ्य
मस्तिष्क का सीधा रिश्ता आपके मानसिक संतुलन, कार्य कुशलता, कार्यक्षमता और स्वास्थ्य से है।
स्वास्थ्य
गुलाम बनाने का सरल तरीका कर्ज से लाद दो।
धन
जीवन को सफल और सरल बनाने हेतु प्रत्येक तरह के अन्तराल का उचित समय पर उपयोग होना अत्यन्त आवश्यक है।
समय
ब्रेन हेमरेज, माइग्रेन जैसी बीमारियों से बचने के लिए आधा घंटे विचारों/चिंताओं पर काबू पाकर स्वयं पर ध्यान केन्द्रित करें।
स्वास्थ्य
शरीर के आरोग्य होने पर ही रत्नत्रय की प्राप्ति संभव है।
स्वास्थ्य
जो श्वास को मंद कर लेता है उसके कामादि के वेग कम हो जाते हैं।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य ही जीवन की खुशियों को जीवंत बनाता है, अच्छे स्वास्थ्य के बिना हर खुशी नीरस होती है।
स्वास्थ्य
जब एक अंगुल शरीर में ९६ रोग हो सकते हैं तो आप शरीर से स्वस्थ कैसे रह सकते हैं, हाँ शरीर के अस्वस्थ होने पर चित्त को स्वस्थ रख सकते हो, शरीर अस्वस्थ हो जाये तो मोक्षमार्ग में कोई बाधा नहीं आती है, लेकिन यदि चित्त अस्वस्थ हो गया तो फिर शरीर भले ही स्वस्थ बना रहे तो भी मोक्षमार्ग में नियम से बाधा आती है।
स्वास्थ्य
थकने से पूर्व ही विश्राम कर लीजिए, इससे आप अधिक काम कर सकेंगे।
स्वास्थ्य
बुढ़ापा शरीर का उतना धर्म नहीं है जितना मन का धर्म है।
स्वास्थ्य
नशे का जोश ताकत नहीं है, ताकत वह है जो अपने बदन में हो।
स्वास्थ्य
हरड़ मनुष्य के लिए माता के समान हितकारी होती है माता तो कभी कुपित भी हो जाती है पर उदरस्थ हरड़ कभी कुपित नहीं होती है।
स्वास्थ्य
तन्दुरुस्ती के बराबर आनन्द किसी में नहीं है, संतोष के बराबर कोई ऐश्वर्य नहीं है।
स्वास्थ्य
प्राणायाम से चित्त शुद्ध हो जाता है और विशुद्ध चित्त में अन्तः प्रकाश स्वरूप शुद्ध आत्म तत्त्व का साक्षात्कार होने लगता है।
ध्यान
गीले पाँव रखकर भोजन करने वाला दीर्घायु होता है।
स्वास्थ्य
बहुत बार भोजन करने से शरीर की पुष्टि, कान्ति, उत्साह, प्रयोग और बल में कमी आती है। अतः अपनी शक्ति को देखते हुए भोजन करना चाहिए मान के वश होकर न बहुत अधिक और न बहुत कम ही भोजन करना चाहिए।
आहार
गौमांस रोग है, उसका दूध आरोग्य है और औषधि भी है।
स्वास्थ्य
जल सब रोगों की एक मात्र दवा है। जल अन्न की अपेक्षा उत्कृष्ट है।
स्वास्थ्य
प्यास बहुत भयंकर व तुरन्त प्राण विनाशनी होती है अतः जीवन धारण करने के लिए आवश्यक जल प्यासे को देना चाहिए।
स्वास्थ्य
अजीर्ण में जल औषधि है और जीर्ण में जल बल प्रदान करने वाला है। आधे भोजन के बीच जल अमृत है और भोजन के पश्चात् जल विष है।
स्वास्थ्य
सभी रोगों के विनाश के लिए रात्रि के अंत अर्थात् प्रातःकाल जल पीना चाहिए।
स्वास्थ्य