Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 40

निंदा जिन्दा की होती है, मृतक की प्रशंसा करते हैं

82 सूत्र · पृष्ठ 2 / 2

भला बनने के लिए हमें कुछ करने की जरूरत नहीं है, केवल बुराई सर्वथा छोड़ दें तो हम भले हो जायेंगे।
चरित्र
वही सुखी होता है जो अपने किए पापों का सदा पश्चाताप करता रहता है।
कर्म
यह मत सोचो की लोग क्या कहेंगे? क्योंकि उनको जो कहना है वे तो कहेंगे ही। एक बार चंदू दादा जी अपने पप्पू को घोड़े पर बिठाकर जा रहे थे, तो कुछ लोगों ने देखकर कहा–बेटा आपको शर्म नहीं आती दादाजी पैदल चल रहे और आप घोड़े पर बैठे हो। तो पप्पू घोड़े से उतरकर चलने लगा और दादाजी को घोड़े पर बिठा दिया, आगे कुछ लोगों ने कहा–अरे दादाजी जरा विचार करो छोटा-सा बच्चा पैदल चल रहा और आप घोड़े पर बैठे हो तो अब वे दोनों घोड़े पर बैठकर आगे बढ़े परन्तु पुनः किसी ने कहा–क्या आपके पास दया नाम की कोई चीज नहीं है, जो एक घोड़े पर दोनों बैठे हो, अतः अब वे दोनों पैदल घोड़े को लेकर चलने लगे लेकिन एक व्यक्ति ने कहा–दुनिया में बहुत मूर्ख देखे हैं पर आप जैसे नहीं, जो घोड़े को साथ लिए हो और फिर भी पैदल चल रहे हो।
विवेक
रावण जैसे महाज्ञानी भी स्त्री के रूप आदि से मोहित होकर अपना विवेक खो गये थे।
अनासक्ति
जिस बाप ने दुकान को खड़ा किया, बकरे की पर्याय में वह वहाँ खड़े होने लायक नहीं रहता है।
कर्म
संसारी प्राणी निंदा में अपनी हानि समझकर लोकलाज से संक्लिष्ट बना रहता है।
वाणी
निंदक स्वयं नरक का भार लेता है और दूसरों को नरक से बचाता है।
वाणी
उद्यापन में समाज को भोजन कराने की इस विकृत परम्परा के कारण असमर्थ लोग व्रत करने से डरने लगे हैं।
धर्म
मंदिर की द्रव्य से पूजा करके होटल की कचौरी बराबर भी पैसा दान नहीं देते हैं।
दान
जिसने ९ माह पेट में रखा, दूध पिलाया, बड़ा किया उसी माँ के आँसू बहाये तब दूसरे के साथ क्या करोगे?
परिवार
नौकर की जरूरत पड़ती है तब बाप की याद आती है दरअसल बाप से ज्यादा भरोसेमंद नौकर कहाँ मिलेगा?
परिवार
व्यक्ति जितना कर्मबंध भोग-भोगकर नहीं करता, उससे अधिक नयनों से निहारकर करता है।
कर्म
गलती निकालने के लिए बुद्धि चाहिए, गलती स्वीकारने के लिए 'कलेजा' चाहिए, गलती करना पाप है, पर उसे छुपाना महापाप है।
चरित्र
हर व्यक्ति से गलतियाँ होती हैं, लेकिन कुछ लोगों को गलतियाँ करने का शौक होता है जो एकदम बुरी बात है।
चरित्र
एक माँ बेटे को जन्म देने के लिए सुन्दरता को त्याग देती है और वही बेटा एक सुन्दर पत्नि को पाने के लिए माँ को त्याग देता है।
परिवार
जुआ सगे बाप का न हुआ। जुआ के कारण ही युधिष्ठिर आदि पाँच पाण्डवों को १२ वर्ष तक वनवास हुआ था, जिससे द्रौपदी आदि को एवं समस्त परिवार को दुःखी होना पड़ा था।
संयम
शराब पीने से प्राणी की स्मरण शक्ति क्षीण होती है, शराब से व्यक्ति की कामाग्नि अति तीव्र होती है, जिससे व्यक्ति स्वस्त्री से संतुष्ट न होकर परस्त्री एवं वेश्या सेवन करता है। शिकारी सदा भिखारीवत् होता है।
संयम
जैसे कौआ जल से पूर्ण तालाब के रहते हुए भी घड़े का पानी पीता है, वैसे ही नीच मनुष्य स्त्री के अपने अधीन रहते हुए भी पर स्त्री लम्पट होता है।
ब्रह्मचर्य
समीचीन मार्ग से स्खलन होना, विवेक का नष्ट होना, बुद्धि रूपी लता का उखाड़ा जाना, अपने शरीर का दमन, नीचत्व की प्राप्ति, सम्यग्ज्ञान का आवरण, अपने धन का हरण, पाप की वृद्धि ये सब दोष पर स्त्री सेवन से होते हैं, परस्त्री सेवन की बात ही क्या कहे दर्शन ही क्लेश दायक होता है।
ब्रह्मचर्य
कभी किसी का विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि विरोध करने से अपना ही नाश होता है, अन्य का कुछ नहीं बिगड़ता है।
क्षमा
वो बुलन्दियाँ व्यर्थ हैं जहाँ पहुँचने के लिए अपनों को ही रौंदा जाता है।
चरित्र
रात्रि भोजन से यह मनुष्य इस लोक में कुष्ठ तथा पित्त के प्रकोप आदि समस्त रोगों के समूह को और परलोक में नरकादि गतियों को पाता है।
आहार