Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

समीचीन मार्ग से स्खलन होना, विवेक का नष्ट होना, बुद्धि रूपी लता का उखाड़ा जाना, अपने शरीर का दमन, नीचत्व की प्राप्ति, सम्यग्ज्ञान का आवरण, अपने धन का हरण, पाप की वृद्धि ये सब दोष पर स्त्री सेवन से होते हैं, परस्त्री सेवन की बात ही क्या कहे दर्शन ही क्लेश दायक होता है।

Straying from the right path, loss of discernment, uprooting of the creeper of wisdom, ruin of one's body, degradation, veiling of right knowledge, loss of wealth, and growth of sin — all these faults arise from consorting with another's wife; indeed even the mere sight of her brings anguish.

— आराध्य सूत्र · #3553

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य