Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

यह मत सोचो की लोग क्या कहेंगे? क्योंकि उनको जो कहना है वे तो कहेंगे ही। एक बार चंदू दादा जी अपने पप्पू को घोड़े पर बिठाकर जा रहे थे, तो कुछ लोगों ने देखकर कहा–बेटा आपको शर्म नहीं आती दादाजी पैदल चल रहे और आप घोड़े पर बैठे हो। तो पप्पू घोड़े से उतरकर चलने लगा और दादाजी को घोड़े पर बिठा दिया, आगे कुछ लोगों ने कहा–अरे दादाजी जरा विचार करो छोटा-सा बच्चा पैदल चल रहा और आप घोड़े पर बैठे हो तो अब वे दोनों घोड़े पर बैठकर आगे बढ़े परन्तु पुनः किसी ने कहा–क्या आपके पास दया नाम की कोई चीज नहीं है, जो एक घोड़े पर दोनों बैठे हो, अतः अब वे दोनों पैदल घोड़े को लेकर चलने लगे लेकिन एक व्यक्ति ने कहा–दुनिया में बहुत मूर्ख देखे हैं पर आप जैसे नहीं, जो घोड़े को साथ लिए हो और फिर भी पैदल चल रहे हो।

Do not think about what people will say, for they will say whatever they wish anyway. Once grandfather Chandu was travelling with his grandson Pappu seated on a horse; some people said, 'Boy, aren't you ashamed — grandpa walks while you ride?' So Pappu got down and put his grandfather on the horse; ahead others said, 'Grandpa, consider — a small child walks while you ride!' So both mounted the horse and rode on; but again someone said, 'Have you no mercy, both riding one horse?' So both got down and led the horse on foot; but then a man said, 'I've seen many fools in the world, but none like you — leading a horse yet walking on foot.'

— आराध्य सूत्र · #3537

इसी विषय के और सूत्र

सभी विवेक →
प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक