Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

एकः स्वादु न भुञ्जीत्, स्वार्थमेको न चिन्त्येत्। एको न गच्छेदध्वानं नैकः सुप्तेषु जागृयात्।।

समूह में अकेले स्वादिष्ट भोजन नहीं करना चाहिए, अकेले अपना स्वार्थ सिद्ध नहीं करना चाहिए, रास्ते में अकेले नहीं चलना चाहिए, तथा सब सो रहे हों तब अकेले जागृत नहीं रहना चाहिए।

One should not eat tasty food alone in a group, nor pursue self-interest alone, nor travel the road alone, nor stay awake alone while everyone else sleeps.

— आराध्य सूत्र · #62

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति