Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

वृथा वृष्टिः समुद्रेषु, वृथा तृप्तस्य भोजनं। वृथा दानं समर्थस्य, वृथा दीपो दिवापि च।।

समुद्र में पानी का बरसना व्यर्थ है, जिसका पेट भरा है उसको भोजन कराना व्यर्थ है, समर्थ को दान देना व्यर्थ है और दिन में दीपक जलाना भी व्यर्थ है।

Rain upon the sea is futile, feeding one whose stomach is full is futile, giving charity to the capable is futile, and lighting a lamp in daytime is futile.

— आराध्य सूत्र · #61

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक