Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 79

वाणी वीणा हो, बाण नहीं

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परोक्ष-अपरोक्ष रूप में सहयोग करने वाले को 'धन्यवाद' देना नैतिक जिम्मेदारी है।
वाणी
जो काम पैसे से नहीं हो सकता वह काम इस जादुई शब्द 'धन्यवाद' से संभव है।
वाणी
शुद्धि की विधि बताने के अतिरिक्त कभी भी भोजन कथा मत करो।
आहार
जो पुरुष दूसरों की शान्ति की परवाह न करके किसी भी क्षम्य बात को अशान्ति से कहता है, वह निर्दयी पुरुष है, उसका मनोबल हीन हो जाता है और स्वयं अशान्त रहता है, अत: प्रत्येक बात को सावधानी से दूसरों की शान्ति की रक्षा का विचार करते हुए रखो।
वाणी
मेहमानों से या मोबाइल पर संक्षेप में बात करें।
वाणी
बहस में अक्सर वही जीतता है जो ऊँचा बोल पाता है।
वाणी
समय ही अपना धन है।
समय
जिसकी चर्चा और चर्या एक होती है उसकी वाणी में ओज होता है।
चरित्र
वाचालता अल्पज्ञता की पहचान है।
वाणी
मधुरवाणी शत्रु को भी मित्र बनाती है।
वाणी
इंसान की तरह बोलना न आये तो जानवर की तरह मौन रहो।
वाणी
सर्वाधिक धारा प्रवाही वक्ता अथवा सर्वाधिक उपयुक्त तार्किक सदैव न्याय पूर्ण विचारक नहीं होते हैं।
वाणी
कठोर तर्क प्रस्तुत करते समय कोमल शब्दों का प्रयोग करें।
वाणी
जो वाक्य बिजली के तार की तरह हृदय को धक्का न दे सके उसे निष्फल जानो।
वाणी
तीर्थंकर जैसे महायोगी जिन्होंने सभी कार्य करना छोड़ दिया पर उपदेश करना नहीं छोड़ा और तब तक नहीं छोड़ा जब तक कि अशरीरी सिद्ध नहीं हो गये अत: जब तक शरीर में शक्ति हैं, जिह्वा में दम है, जब तक कण्ठ काम करना बंद न कर दे तब तक उपदेश देना बंद नहीं करना चाहिए।
धर्म
सार्थक और प्रभावी उपदेश वह है जो वाणी से नहीं अपने आचरण से दिया जाता है।
चरित्र
दूसरों को सुनाने के लिए अपनी आवाज ऊँची मत करो, बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊँचा बनाओ कि आपको सुनने के लिए लोग निवेदन करें।
वाणी
कड़क लफ्जों में हल्की बात कहने की बजाय 'नरम' लफ्जों में ठोस बात कहें।
वाणी
जिसकी भाषा में संयम नहीं उसके भावों में संयम नहीं होता है।
संयम
शब्दों में दयाभाव रखने से आत्म विश्वास बढ़ता है, विचारों में दया रखने से गंभीरता आती है, हृदय में दया रखने से प्रेम बढ़ता है।
अहिंसा
एक बेहतरीन इंसान अपनी जुबान से ही पहचाना जाता है, वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती हैं।
वाणी
दावानल से जला वन हरा भरा हो जाता है पर जिह्वारूपी अग्नि से जला हृदय चिरकाल में भी प्रसन्न चित्त नहीं हो पाता है।
वाणी
कष्ट काँटों के चुभने से कम बातों के चुभने से ज्यादा होता है।
वाणी
बात इतनी मधुर रखो कि कभी वापस लेनी पड़े तो खुद को कड़वी न लगे।
वाणी
सम्यग्ज्ञान से रहित अज्ञानी जिन कर्मों को लाख करोड़ भवों में नष्ट करता है, सम्यग्ज्ञानी उन कर्मों को मन-वचन-काय को क्षण भर में वश में करके नष्ट कर देता है।
कर्म
साधु के वचन मृदु, मधुर, गंभीर, हितकर और संशय को हरने वाले होते हैं।
वाणी
वाणी वाण न बने वीणा जैसी गुंजायमान हो।
वाणी
अधिक बोलने वालों की अपेक्षा कम बोलने वालों के शब्दों में अधिक वजन होता है।
वाणी
जरूरी नहीं कि कुछ तोड़ने के लिए पत्थर ही मारा जाये, लहजा बदलकर बोलने से भी बहुत कुछ टूट जाता है।
वाणी
जिन्दगी की आधी शिकायतें ऐसे ही ठीक हो जायें, अगर लोग एक दूसरे के बारे में बोलने की जगह, एक दूसरे से बोलना सीख जाएँ।
वाणी
प्यार के दो मीठे बोल से खरीद लो मुझे, दौलत दिखाई तो सारे जहाँ की कम पड़ जायेगी।
वाणी
शब्दों के दाँत नहीं होते लेकिन जब काटते हैं तो दर्द बहुत होता है और कभी-कभी घाव इतने गहरे होते हैं कि जीवन समाप्त हो जाता पर घाव नहीं भर पाते हैं।
वाणी
अपने शब्दों में ताकत डालें आवाज में नहीं क्योंकि फूल बारिश से खिलते हैं, तूफान से नहीं।
वाणी
लाठी-पत्थर से हड्डियाँ टूटती हैं पर शब्दों से प्राय: सम्बन्ध टूटते हैं।
वाणी
जो ज्यादा बोलते हैं, समझना कि उनका संसार बहुत दीर्घ है।
वाणी
जो अत्यन्त कुपित होने पर भी दुर्वचन नहीं बोलता वह समस्त पृथ्वी पर श्रेष्ठ धर्मात्मा है।
क्षमा
बोली गोली से छोटी होती है पर बोली गोली से खोटी होती है।
वाणी
जब मधुर वाणी से सर्प भी वश में हो जाता तो इंसान क्या बड़ी बात है?
वाणी
जो वाणी मित्रों रिश्तेदारों के सामने निकलती है, वही परिवार वालों के सामने निकले तो घर स्वर्ग बन जाये। ''जिस वाणी में स्व-पर हित निहित हो वही सार्थक है।''
परिवार
मिश्री की मिठास कण्ठ पर जाकर समाप्त हो जाती है पर वाणी तन-मन को प्रसन्न कर हृदय को आनंद से भर देती है, अत: ज्यादा मीठी है।
वाणी
कर्कश वाणी पशुत्व का प्रतीक है, मधुर वाणी देवत्व का प्रतीक है।
वाणी
समयानुसार बोलने वाला ही बुद्धिमान होता है।
वाणी
रिश्ते पंछियों की तरह होते हैं, जोर से पकड़ो तो मर सकते हैं, धीरे से पकड़ो तो उड़ सकते हैं, लेकिन प्यार से पकड़कर रखो तो जिन्दगी भर साथ में रहते हैं।
परिवार
अच्छे लोगों की एक खूबी ये भी है कि उन्हें याद रखना नहीं पड़ता, वे याद आते हैं।
संगति
मीठा बोलने में खर्च कुछ नहीं होता मुफ्त में दूसरों का स्नेह और सम्मान प्राप्त होता है।
वाणी