Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
वाणी

जो पुरुष दूसरों की शान्ति की परवाह न करके किसी भी क्षम्य बात को अशान्ति से कहता है, वह निर्दयी पुरुष है, उसका मनोबल हीन हो जाता है और स्वयं अशान्त रहता है, अत: प्रत्येक बात को सावधानी से दूसरों की शान्ति की रक्षा का विचार करते हुए रखो।

One who, careless of others' peace, speaks even a pardonable matter with agitation is cruel; his morale weakens and he himself stays restless—so speak every matter carefully, guarding the peace of others.

— आराध्य सूत्र · #6462

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