Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Health

स्वास्थ्य

210 सूत्र · पृष्ठ 2 / 3

जो एक बार में अत्यधिक पानी पीता है उसकी जठराग्नि मन्द पड़ती जाती है।
स्वास्थ्य
परिश्रम से थके व्यक्ति द्वारा बिना विश्राम किए तत्काल पिया हुआ पानी और भक्षण किया हुआ भोजन ज्वर या वमन पैदा कर देता है।
स्वास्थ्य
नीरोग शरीर में निर्विकार मन का वास होता है।
स्वास्थ्य
मन की बीमारी में तन का इलाज कराने से क्या लाभ? बल्कि इससे बीमारी और बढ़ती है।
स्वास्थ्य
मन को हर्ष व आनन्दमय बनाओ, इससे हजारों प्रकार की क्षतियों से बचोगे और दीर्घजीवी बनोगे।
स्वास्थ्य
भविष्य की चिन्ता से आँखों के रोग तथा ब्लडप्रेशर रोग तैयार होते हैं।
स्वास्थ्य
अपनी जिद पर अड़े रहने की आदत से पेट के रोग उत्पन्न होते हैं।
स्वास्थ्य
भय से गुर्दे और मूत्राशय को हानि पहुँचती है।
स्वास्थ्य
दुःख दबाने से फेफड़ों और बड़ी आँत की कार्य क्षमता कम होती है।
स्वास्थ्य
अधीरता व क्षणिक आवेश से हृदय व छोटी आँत को हानि पहुँचती है।
स्वास्थ्य
रोग उपचार की बजाय पथ्य पालन ज्यादा हितकर है।
स्वास्थ्य
नकारात्मक विचार बीमारियों को आमंत्रण देते हैं।
स्वास्थ्य
मन में जिस प्रकार के विचार होते हैं शरीर पर उनका वैसा ही प्रभाव होता है।
स्वास्थ्य
युद्ध की अपेक्षा नशे ने मानव जाति को अधिक नुकसान पहुँचाया है।
स्वास्थ्य
व्यसन और फैशन व्यक्ति के पतन का कारण है।
स्वास्थ्य
कुदरत ने आपको हर चीज से निपटने की शक्ति दी है।
स्वास्थ्य
शरीर को रोगी या दुर्बल रखने के समान कोई पाप नहीं है।
स्वास्थ्य
शरीर भले ही कमजोर हो पर मन को कमजोर मत बनाइये।
स्वास्थ्य
जिसके अंतरंग में शान्ति है उसे बाह्य वेदना कभी कष्ट नहीं दे सकती है।
स्वास्थ्य
सदाचारी, श्रद्धावान् और ईर्ष्या रहित मनुष्य सौ वर्ष तक जीवित रहता है चाहे वह सब प्रकार के शुभ लक्षणों से हीन हो।
स्वास्थ्य
कमजोर होना दुःखी होना है।
स्वास्थ्य
तन के स्वस्थ ही नहीं मन के स्वस्थ भी बनो।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य लाभ का इच्छुक कम खाये, कम पीये और कम बोले।
स्वास्थ्य
तमाम शारीरिक तथा मानसिक कार्य व्यायाम में सम्मिलित है।
स्वास्थ्य
तन्दुरुस्ती ठीक न हुई तो दुनिया के सारे सुख बेकार है।
स्वास्थ्य
शरीर के स्वस्थ होने का मतलब है कि मनुष्य का मन भी स्वस्थ है।
स्वास्थ्य
शारीरिक और मानसिक दोनों व्यायाम सीमा के अन्दर ही रहकर करना चाहिए।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन बहुत ही जरूरी है।
स्वास्थ्य
स्वस्थ व्यक्ति की पहिचान पैर गरम, पेट नरम, सिर ठंडा।
स्वास्थ्य
सुन्दर स्वास्थ्य परिश्रम के पसीने से प्राप्त होता है।
स्वास्थ्य
व्यक्ति जितना व्यस्त उतना स्वस्थ।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य है तो सब कुछ है, स्वास्थ्य न हो तो कुछ भी नहीं अतः स्वस्थ रहें।
स्वास्थ्य
जितनी कैलोरी शरीर में बन रही है वह प्रतिदिन खर्च होना जरूरी है अन्यथा बची कैलोरी मोटापा बढ़ाती है।
स्वास्थ्य
दिन प्रतिदिन बढ़ रहे रासायनिक खाद कीटनाशक, कलर के जहर से हमें बचना चाहिए।
स्वास्थ्य
अगर हम चाहते हैं कि हमारा शरीर पूरी ईमानदारी से २४ घंटे हमारा साथ दे तो एक घंटा व्यायाम के माध्यम से उसका ख्याल रखना चाहिए।
स्वास्थ्य
योग भारत की सबसे प्राचीन कला है।
स्वास्थ्य
हमारा शरीर जन्म से मृत्यु तक लगातार कार्य करता है और हम मशीन से बढ़कर इसका उपयोग करते हैं।
स्वास्थ्य
हमें शरीर का पूरा ख्याल रखना होगा क्योंकि हमारे शरीर की उपयोगिता बहुत अधिक है।
स्वास्थ्य
शरीर व मन को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार व नियमित व्यायाम जरूरी है।
स्वास्थ्य
जाग्रत मन को पूरे शरीर से तालमेल हेतु प्रत्येक डेढ़ घंटे पश्चात् लगातार कार्य करने पर मस्तिष्क की ग्रहण क्षमता क्षीण हो जाती है इसलिए बीच में विषय बदलना आवश्यक है।
स्वास्थ्य
शरीर का मशीन की तरह लगातार उपयोग न करें।
स्वास्थ्य
मस्तिष्क का सीधा रिश्ता आपके मानसिक संतुलन, कार्य कुशलता, कार्यक्षमता और स्वास्थ्य से है।
स्वास्थ्य
ब्रेन हेमरेज, माइग्रेन जैसी बीमारियों से बचने के लिए आधा घंटे विचारों/चिंताओं पर काबू पाकर स्वयं पर ध्यान केन्द्रित करें।
स्वास्थ्य
शरीर के आरोग्य होने पर ही रत्नत्रय की प्राप्ति संभव है।
स्वास्थ्य
जो श्वास को मंद कर लेता है उसके कामादि के वेग कम हो जाते हैं।
स्वास्थ्य
स्वास्थ्य ही जीवन की खुशियों को जीवंत बनाता है, अच्छे स्वास्थ्य के बिना हर खुशी नीरस होती है।
स्वास्थ्य
जब एक अंगुल शरीर में ९६ रोग हो सकते हैं तो आप शरीर से स्वस्थ कैसे रह सकते हैं, हाँ शरीर के अस्वस्थ होने पर चित्त को स्वस्थ रख सकते हो, शरीर अस्वस्थ हो जाये तो मोक्षमार्ग में कोई बाधा नहीं आती है, लेकिन यदि चित्त अस्वस्थ हो गया तो फिर शरीर भले ही स्वस्थ बना रहे तो भी मोक्षमार्ग में नियम से बाधा आती है।
स्वास्थ्य
थकने से पूर्व ही विश्राम कर लीजिए, इससे आप अधिक काम कर सकेंगे।
स्वास्थ्य
बुढ़ापा शरीर का उतना धर्म नहीं है जितना मन का धर्म है।
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नशे का जोश ताकत नहीं है, ताकत वह है जो अपने बदन में हो।
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हरड़ मनुष्य के लिए माता के समान हितकारी होती है माता तो कभी कुपित भी हो जाती है पर उदरस्थ हरड़ कभी कुपित नहीं होती है।
स्वास्थ्य
तन्दुरुस्ती के बराबर आनन्द किसी में नहीं है, संतोष के बराबर कोई ऐश्वर्य नहीं है।
स्वास्थ्य
गीले पाँव रखकर भोजन करने वाला दीर्घायु होता है।
स्वास्थ्य
गौमांस रोग है, उसका दूध आरोग्य है और औषधि भी है।
स्वास्थ्य
जल सब रोगों की एक मात्र दवा है। जल अन्न की अपेक्षा उत्कृष्ट है।
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प्यास बहुत भयंकर व तुरन्त प्राण विनाशनी होती है अतः जीवन धारण करने के लिए आवश्यक जल प्यासे को देना चाहिए।
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अजीर्ण में जल औषधि है और जीर्ण में जल बल प्रदान करने वाला है। आधे भोजन के बीच जल अमृत है और भोजन के पश्चात् जल विष है।
स्वास्थ्य
सभी रोगों के विनाश के लिए रात्रि के अंत अर्थात् प्रातःकाल जल पीना चाहिए।
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अपनी उन्नति चाहने वाले पुरुषों को वही वस्तु खानी चाहिए, जो खाने योग्य हो, पच सके और पच जाने पर हितकारी हो।
स्वास्थ्य
शरीर के लिए औषधि की कोई आवश्यकता न हो, यदि खाया हुआ भोजन पच जाने के बाद ही दुबारा भोजन किया जाये एवं शान्ति पूर्वक किया हुआ भोजन ही दीर्घायु का सर्वोत्तम उपाय है।
स्वास्थ्य
जो व्यक्ति मूर्खता से अपनी प्रकृति के प्रतिकूल एवं जठराग्नि से ज्यादा ठूस-ठूस कर खाता है उसे अनगिनत रोग घेरे ही रहते हैं।
स्वास्थ्य
जिसके हृदय में करुणा, प्रेम, दया एवं अनुराग होता है उसके शरीर में स्वास्थ्यवर्धक श्वेत कणों की वृद्धि होती है।
स्वास्थ्य
सिर्फ दिल है जो बिना आराम किए सालों साल काम करता रहता है, अतः इसे हमेशा खुश रखिये चाहे अपना हो या दूसरों का।
स्वास्थ्य
जो हितकारी आहार-विहार करता है, सोच-विचार कर काम करता है, विषयों में आसक्त नहीं होता है, दानी है, समतावान है, सत्यनिष्ठ है, क्षमावान है और ज्ञानियों की सङ्गति करता है वह हमेशा नीरोग रहता है।
स्वास्थ्य
विश्राम और शिथलीकरण- शारीरिक एवं मानसिक मेहनत के बीच-बीच में विश्राम (योग निद्रा) करते रहें।
स्वास्थ्य
अच्छी नींद लीजिए- अच्छी मानसिकता से, सात्विक भोजन व शान्तिपूर्ण जीवन से सुखद नींद आती है।
स्वास्थ्य
सही मुद्राओं में रहें स्थिर एवं सीधी आसन से बैठें जिससे गर्दन, रीड की हड्डी, कमर आदि पर गलत असर न हो।
स्वास्थ्य
आपके मन पर तापमान, जलप्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और मानसिक प्रदूषण प्रभाव डालते हैं, इनसे बचें।
स्वास्थ्य
जो भोजन, निद्रा और व्यायाम चिन्ता रहित होकर करता है तथा सदा हँसमुख रहता है वह दीर्घायु होता है।
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हँसी संक्रमण की बीमारी है, एक को हँसते हुए देखकर दूसरे को हँसी आ ही जाती है।
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जब मैं स्वयं पर हँसता हूँ तो मेरा बोझ हल्का हो जाता है।
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हास्य वह मिश्री है जो उपदेश की कड़वी कुनैन को भी इतना मीठा बना देती है कि बच्चों से लेकर बूढ़े तक उसे बड़ी रूचि से खा लेते है, हास्य पाचन क्रिया को ठीक करने की बहुत अच्छी दवा है।
स्वास्थ्य
अधिक बैठे रहने से, अधिक भोजन से, अधिक विषय सेवन से, मलमूत्र रोकने से, अधिक जागने से, अभक्ष्य भक्षण से रोगों की उत्पति होती है।
स्वास्थ्य
'अर्ध रोग हरी निद्रा, सर्व रोग हरी क्षुधा' सोने से आधा रोग दूर होता है और भोजन करने से पूरा रोग दूर होता है।
स्वास्थ्य
मरने के लिये चुटकी भर जहर काफी होता है और जीने के लिए स्वस्थ सन्तुलित आहार लेना जरूरी है।
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