Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

आत्मा की बात दुर्लभ- भोगों की बातों को सिखाने वाले जगह-जगह टी.वी., कम्प्यूटर आदि साधन मिल जाते हैं, किन्तु आत्मा की बात सिखाने वाले दुर्लभ हैं, अतः आत्मा की बात सिखाने वालों की सङ्गति करना चाहिए।

Talk of the soul is rare: everywhere one finds TV, computers and other means that teach about sensual pleasures, but those who teach about the soul are rare — so one should keep the company of those who teach about the soul.

— आराध्य सूत्र · #34

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति