Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

अयं निजः परोवेति, गणनालघु चेतसां। उदारचरितानां तु, वसुधैव कुटुम्बकं।।

यह हमारा है, यह पराया है ऐसी मान्यता छोटे मन वालों की होती है, किन्तु उदार चरित्र वालों के लिए तो सारी पृथ्वी ही कुटुम्ब होती है।

'This is mine, that is a stranger's' — such reckoning belongs to the small-minded; but for the noble-hearted the whole earth is one family.

— आराध्य सूत्र · #2

इसी विषय के और सूत्र

सभी संगति →
संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति