हीयते हि मतिस्तात्!, हीनैः सह समागमात्। समैश्च समतामेति, विशिष्टैश्च विशिष्टतां।।
नीच लोगों की सङ्गति करने से मति हीन हो जाती है, बराबरी वालों की सङ्गति से मति बराबर रहती है और विशिष्ट लोगों की सङ्गति करने से मति विशिष्ट हो जाती है।
By keeping company with the low the intellect is debased, with equals it stays level, and with the distinguished it becomes distinguished.
— आराध्य सूत्र · #8
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