Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

कीटोऽपि सुमनसङ्ग-, दारोहति सतां शिरः। अश्मापि याति देवत्वं, महद्भिः सुप्रतिष्ठतः।।

पुष्पों की सङ्गति से कीड़ा भी सज्जनों के सिर पर चढ़ जाता है और महापुरुषों के द्वारा प्रतिष्ठित होकर पत्थर भी देवत्व को प्राप्त हो जाता है।

Through the company of flowers even an insect rises to the heads of the good, and consecrated by great souls even a stone attains divinity.

— आराध्य सूत्र · #6

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति