Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

ज्ञान बढ़े गुणवान की संगति, ध्यान बढ़े तपसी संग कीने। मोह बढ़े परिवार की संगति, लोभ बढ़े धन में चित दिने। क्रोध बढ़े नर मूढ़ की संगति, काम बढ़े तिय को संग कीने। बुद्धि विवेक विचार बढ़े, कवि दीन सो सज्जन संगति कीजे॥

Knowledge grows in the company of the virtuous, meditation in the company of ascetics; delusion grows in family company, greed by fixing the mind on wealth; anger grows in the company of foolish men, lust in the company of women; intellect, discernment, and reflection grow — so, says the poet Deen, keep the company of the good.

— आराध्य सूत्र · #15

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति