Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

साधूनां दर्शनं पुण्यं, तीर्थभूता हि साधवः। कालेन फलति तीर्थः, सद्यः साधु समागमः।।

साधुओं का दर्शन पुण्य वर्धक है क्योंकि साधु तीर्थ स्वरूप होते हैं, तीर्थ काल पाकर फलदायी होता है किन्तु साधु समागम तत्काल फलदायी होता है।

Beholding holy ones increases merit, for saints are themselves places of pilgrimage; a pilgrimage bears fruit in due time, but the company of a saint bears fruit at once.

— आराध्य सूत्र · #3

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति