Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भाग 1 · अध्याय 2

णमोकार की महिमा

83 सूत्र · पृष्ठ 2 / 2

दुःख दायक बीमारी में, समुद्र में, वन में, मृत्यु में, भयंकर युद्ध में, सब आपदाओं में यह मन्त्र ही जीवों का शरण है रक्षक है दूसरा कोई नहीं है।
णमोकार
रण में, राजदरबार में, अग्नि में, जल में, भारी संकट में, श्मशान में, वन में और शत्रु के विषय में यह मन्त्र ही निश्चय से सिद्धिदायक है।
णमोकार
सुमन्त्र का ध्यान करने में तत्पर रहने वाले मनुष्य इन्द्र, अहमिन्द्र, चक्रवर्ती तथा बलभद्र आदि के उत्तम पद एवं अन्य महान् पदों का उपभोग करते हैं।
णमोकार
मन्त्र के प्रभाव से कुत्ते ने भी देव पद, धनपति सेठ ने नीरोगता और जिनदत्त सेठ ने आकाशगामिनी विद्या प्राप्त की थी।
णमोकार
मन्त्र का समस्त प्रभाव योगी भी नहीं कह सकते हैं, उसे जो अज्ञानी कहता है, वह वायुरोग से पीड़ित है ऐसा मैं मानता हूँ।
णमोकार
मन्त्र के प्रसाद से त्रिभुवन में होने वाली धर्मनिमित्तक लक्ष्मियाँ धर्मात्मा मनुष्यों के पास दासियों के समान चली आती हैं।
णमोकार
यह मन्त्र सत्पुरुषों को कल्पवृक्ष के समान अभीष्ट सुख को देने वाला है और अमूल्य चिन्तामणि के समान चिन्तित अर्थ को प्रदान करने वाला है।
णमोकार
यह मन्त्र अभिलषित समस्त वस्तुओं को देने वाली कामधेनु है, यह मन्त्र ही प्राणियों का भण्डार है, स्वामी है, पिता है, माता है और इससे बढ़कर दूसरा हितकारी मित्र नहीं है।
णमोकार
इस जगत् में जो कुछ भी दुःसाध्य, दूरवर्ती अथवा अत्यन्त दुर्लभ वस्तु है, वह सब इस मन्त्रराज का ध्यान करने वाले मनुष्यों के हाथ में शीघ्र ही आ जाती है, मन्त्र की सिद्धि पुण्य, साहस और मन की एकाग्रता से होती है।
णमोकार
इस विषय में बहुत कहने से क्या लाभ है ? इतना ही कहना पर्याप्त है कि प्राणी जिस-जिस वस्तु की इच्छा करता है, मन्त्रराज के प्रसाद से उसे वही-वही वस्तु निश्चित ही प्राप्त होती है।
णमोकार
गणेशप्रसाद वर्णी जी के पिता जी जन्म से वैष्णव थे, उनकी णमोकार मन्त्र के प्रति बहुत श्रद्धा थी, उन्होंने वर्णीजी से कहा–तुम जैनधर्म नहीं छोड़ना, एक बार जंगल में बैल पर सामान लादकर जा रहे थे और शेर की आवाज आई, सामान उतार कर बैल को भगा दिया, स्वयं माला फेरने लगे, कुछ भी किए बिना ही शेर उनके पास से निकल गया।
णमोकार
चारुदत्त ने बकरे को णमोकार मन्त्र सुनाया, वह देव हुआ, रत्नगिरी पर्वत पर मुनिराज के निकट बैठे हुए देखकर बकरे के जीव देव ने पहले अपने उपकारी चारुदत्त को नमस्कार किया, बाद में मुनिराज को नमस्कार किया था।
णमोकार
जो बिना अर्थ जाने भी णमोकार को पढ़ता है, तो भी उसका भला होता है, जैसे कुत्ते को जीवन्धर स्वामी ने और बैल को पद्मरुचि सेठ ने सुनाया था, वे अर्थ नहीं जानते थे फिर भी उन्हें सद्गति की प्राप्ति हुई थी।
णमोकार
पञ्चपरमेष्ठी की वन्दना के नामान्तर जिस अक्षर समूह से या परिणाम से या क्रिया से आने वाले कर्मों का नाश होता है, उसे कृतिकर्म कहते हैं, जिससे तीर्थंङ्कर आदि पुण्य कर्म का सञ्चय होता है उसे चितिकर्म कहते हैं, जिससे अर्हन्त आदि की पूजा की जाती है, उसे पूजाकर्म कहते हैं, जिससे कर्मों का संक्रमण, उदय, उदीरणा आदि होकर निराकरण किया जाता है, उसे विनयकर्म कहते हैं, ये सब वन्दना के नामान्तर है, जो मुमुक्षु कर्मों की निर्जरा करना चाहते हैं, उन्हें मोक्ष हेतुक विनय अवश्य करना चाहिए।
णमोकार
मन में विकार उत्पन्न होने पर तत्क्षण सत्ताईस उच्छ्वास प्रमाण कायोत्सर्ग करना चाहिए प्राणी वध सम्बन्धी, झूठ, चोरी, मैथुन, परिग्रह सम्बन्धी दोष लगने पर एक सौ आठ उच्छ्वास प्रमाण कायोत्सर्ग अर्थात् छत्तीस बार णमोकार पढ़ना चाहिए।
णमोकार
मन्त्र जाप के चार भेद हैं– १. बैखरी–जोर से बोलकर जाप करना, इसमें शब्द बाहर बिखर जाते हैं, इससे पच्चीस प्रतिशत लाभ होता है। २. मध्यमा–इसमें ओठ नहीं हिलते हैं जीभ हिलती है, इसे उपांशु भी कहते हैं। ३. पश्यन्ति–इसमें होठ और जीभ दोनों नहीं हिलते हैं, मन में चिन्तन होता है। ४. सूक्ष्म–मन से णमोकार भी छूट जाता है, उपास्य-उपासक आत्मा-परमात्मा का भेद समाप्त हो जाता है।
णमोकार
जिस प्रकार जल में असीम शक्ति है, एक लोटा पानी में विद्युत शक्ति का पता नहीं लगता, जब वह एकत्र होकर सरोवरों में पहुँचता है तो उसमें असीम शक्ति प्रकट हो जाती है, उससे कई मेगावाट बिजली बनने लगती है, जिससे बड़ी-बड़ी मशीने व रेल आदि चलने लगती हैं, बिजली की शक्ति उसमें छिपी है, इसी प्रकार मन की बिखरी शक्ति ध्यान से एकत्र होती है।
ध्यान
मणि, मन्त्र और औषधि में अचिन्त्य प्रभाव होता है, वनस्पति से बनी एक छोटी सी गोली व्यक्ति को जीवन दान दे देती है, मन्त्र में भी विद्युत की तरह शक्ति है, एक मन्त्र से व्यक्ति भस्म हो सकता है, शब्द की भी शक्ति होती है, जैसे–रेडिओ, टेलीविजन पर शब्द सुनते हैं, प्रचण्ड ध्वनि से इमारतें हिल जाती हैं, एक खेत में रसायन से सोलह किलो ककड़ी उत्पन्न की एवं मन्त्र से चालीस किलो ककड़ी उत्पन्न हुई।
णमोकार
मन्त्र जाप से शरीर और मन पर रक्षा कवच बन जाता है, बुरी शक्ति अनिष्ट नहीं कर सकती हैं। मन्त्र के प्रभाव से सोमासती के लिए सर्प भी माला बना, सुदर्शन की सूली सिंहासन बन गयी। पैंतीस अक्षर वाला णमोकार ३+५=८ आठ कर्मों का नाश करने वाला है।
णमोकार
णमोकार पढ़ने से तीनलोक, तीनकाल के नवदेवताओं का स्मरण वन्दन हो जाता है।
णमोकार
श्रीपाल जी का कुष्ठ महामन्त्र के प्रभाव से दूर हुआ था, क्षुद्र देवों द्वारा कीलित पाँच सौ जहाज णमोकार के प्रभाव से चले थे, समुद्र में गिरने पर णमोकार के प्रभाव से जीवित बचे थे, बहुत समय से बन्द सहस्रकूट जिनालय के द्वार णमोकार के प्रभाव से खुले थे।
णमोकार
घटना जखौरा की है–एक मुसलमान भाई ने णमोकार मन्त्र के सहारे अनेक लोगों की विपत्तियाँ दूर कीं, वह सामायिक भी करता था, एक बार पलंग पर लेटा था, थोड़ी देर बाद सपना आया कि तेरे पलंग में सर्प है, उठकर दो-तीन बार ऊपर-नीचे देखा कहीं नहीं दिखा, पुनः णमोकार मन्त्र पढ़कर सो गया, प्रातः बिस्तर लपेटा बिस्तर में से सर्प निकल कर बाहर चला गया, उसका कुछ नहीं हुआ, यह मन्त्र का प्रभाव था, गाँव के मुस्लिम भाइयों को पता चला यह जैन धर्म मानता है, पञ्चायत बुलाई, भला-बुरा कहा, वह सब कुछ सुनता रहा, पर जैनधर्म छोड़ने को तैयार नहीं हुआ, जाति भाइयों ने उसे मार डालने का निर्णय लिया, जिससे दूसरा धर्म ग्रहण नहीं कर सके, सामायिक में बैठा विरोधियों ने वहाँ सर्प छोड़ दिया, वह चारों ओर घूमता रहा उसका कुछ नहीं हुआ, तीन दिन बाद सर्प छोड़ने वाले को ही सर्प ने डँस लिया, वह मर गया, दो दिन बाद उसके पिता को भी काटा, वह भी मर गया, यह था मन्त्र का प्रभाव।
णमोकार
अमेरिका में एक मुसलमान को णमोकार मन्त्र मिल गया, वह मन्त्र से ताबीज बनाता था, सौ डॉलर में बेचता था।
णमोकार