Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
णमोकार

गणेशप्रसाद वर्णी जी के पिता जी जन्म से वैष्णव थे, उनकी णमोकार मन्त्र के प्रति बहुत श्रद्धा थी, उन्होंने वर्णीजी से कहा–तुम जैनधर्म नहीं छोड़ना, एक बार जंगल में बैल पर सामान लादकर जा रहे थे और शेर की आवाज आई, सामान उतार कर बैल को भगा दिया, स्वयं माला फेरने लगे, कुछ भी किए बिना ही शेर उनके पास से निकल गया।

Ganesh Prasad Varni's father was a Vaishnava by birth but had great faith in the Namokar Mantra. He told Varni ji—never give up the Jain religion. Once, while travelling through a forest with goods loaded on an ox, a lion roared; he unloaded the goods, drove the ox away, and himself began turning his rosary—and the lion passed by him without doing anything at all.

— आराध्य सूत्र · #195

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णमोकारमन्त्र के एक अक्षर का भी भक्ति पूर्वक नाम लेने से सात सागर के पाप कट जाते हैं, पाँच अक्षरों का उच्चारण करने से पचास सागर के पाप कट जाते हैं तथा पूर्ण मन्त्र का उच्चारण करने से पाँच सौ सागर के पाप कट जाते हैं। सागर का दृष्टान्त– १. सुमेरु पर्वत पर कोई चिड़िया आकर चोंच घिसे और सौ-सौ वर्ष बाद पुनः आ-आकर चिड़िया एक-एक बार चोंच घिसे ऐसा करने पर जितने समय में सुमेरु पर्वत पूरा घिस जाये उससे भी बड़ा एक सागर का काल होता है। २. समुद्र के एक ओर जुआँरी डाली जाए और दूसरी ओर से सेल डाला जाये, जितने समय में लहराते-लहराते जुआँरी सेल में अपने आप घुस जाये उससे भी बड़ा एक सागर का काल होता है।
णमोकार
जो श्रद्धावान, जितेन्द्रिय, भव्य श्रावक एकाग्रचित्त हो सुगन्धित श्वेत पुष्पों से विधिपूर्वक सर्वभय नाशक णमोकार का 'एक लाख जाप' करता है, वह प्राणी 'त्रिलोकपूज्य तीर्थंकर पद' को प्राप्त करता है।
णमोकार
जिन्होंने पञ्चपरमेष्ठियों के नाम से उत्पन्न समस्त विघ्नों को हरने वाले एवं नित्य ऐश्वर्य के साधक नमस्कार मन्त्र का पूर्व में जाप किया था अथवा जो त्रिशुद्धिपूर्वक निरन्तर वर्तमान में उनका जाप करते हैं, वे ज्ञानवान् अतिशय धार्मिक पुरुष 'परलोक में त्रिलोकीनाथ' अवश्य होवेंगे।
णमोकार
जो भव्य प्राणी उठते समय, गिरते समय, विश्राम करते समय, शयन के समय, जाग्रत होने के समय, श्मसान एवं वन में, भय के अवसर पर, विकट मार्ग में, नूतन गृह प्रवेश में, हर कार्य में णमोकारमन्त्र का स्मरण करता है, उसके समस्त विघ्न दूर होकर इच्छित कार्य की सिद्धि नियम से होती है।
णमोकार