चारुदत्त ने बकरे को णमोकार मन्त्र सुनाया, वह देव हुआ, रत्नगिरी पर्वत पर मुनिराज के निकट बैठे हुए देखकर बकरे के जीव देव ने पहले अपने उपकारी चारुदत्त को नमस्कार किया, बाद में मुनिराज को नमस्कार किया था।
Charudatta recited the Namokar Mantra to a goat, and it became a god. On Mount Ratnagiri, seeing him seated near a great monk, the god who had been the goat first saluted his benefactor Charudatta and only afterward saluted the monk.
— आराध्य सूत्र · चारुदत्त चरित्र-आचार्य सोमकीर्ति भट्टारक · #196
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