Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Humility

विनम्रता

456 सूत्र · पृष्ठ 4 / 7

जो अपनी नम्रता से ही उन्नत होते जाते हैं, दूसरों के गुणों की प्रशंसा करते-करते ही अपने गुणों को विख्यात करते हैं, दूसरों के कामों को सिद्ध करने के लिए निरन्तर महान् उद्योग भी करते हुए ही अपने प्रयोजनों को सिद्ध करते हैं और अपनी क्षमा के द्वारा ही निंदा के नीरस अक्षरों से मुखरित मुख वाले दुर्मुखों को दुःखित कर देते हैं- ऐसे अद्भुत आचरण वाले किसके वंदनीय नहीं होते हैं?
विनम्रता
जो मानव अपने अवगुण व दूसरों के गुण देखता है, वही महान् बन सकता है।
विनम्रता
अपना ही दोष ढूँढ़ निकालना ज्ञानवीरों का काम है।
विनम्रता
कोई दूसरा हमारी भूल को सुधारे उससे कहीं अच्छा है कि अपनी भूल अपने ही हाथों सुधार ली जाये।
विनम्रता
जो नित्य गुरुजनों को प्रणाम करता है और वृद्ध पुरुषों की सेवा में लगा रहता है, उसकी कीर्ति, आयु, यश और बल चारों बढ़ते हैं।
विनम्रता
बड़ों से आगे बढ़ने की प्रेरणा लेना चाहिए क्योंकि महापुरुष पैर पूजने के लिए ही नहीं प्रेरणा लेने के लिए भी होते हैं।
विनम्रता
सच्ची नम्रता हमसे तमाम जीवों की सेवा के लिए, सब कुछ न्यौछावर करने की आशा रखती हैं।
विनम्रता
तीव्र तप करता हुआ भी तथा शास्त्र रूपी समुद्र का अवगाहन करता हुआ भी यदि वृद्ध सेवा नहीं करता अर्थात् सत्पुरुषों की आज्ञा में नहीं रहता है तो उसका कदापि कल्याण नहीं हो सकता है।
विनम्रता
दूसरों में महानता देख पाना और उन्मुक्त हृदय से उन्हें उसका गौरव देना मनुष्य की महानता की कसौटी है।
विनम्रता
दूसरों का आदर–सत्कार करना ही सज्जनों की सम्पत्ति होती है।
विनम्रता
जो व्यक्ति दूसरों का आदर सत्कार नहीं जानता है वह क्या पूजा के महत्त्व को कभी जान सकता है?
विनम्रता
भूल होना स्वाभाविक है पर सबके सामने उसे मानने की हिम्मत करना महापुरुषों का ही काम है।
विनम्रता
मैं जीतकर हराना नहीं बल्कि हारकर जीतना चाहता हूँ।
विनम्रता
अहंकारी व्यक्ति कभी संस्कारित नहीं हो सकता है क्योंकि संस्कार अहंकार से नहीं समर्पण से प्राप्त होते हैं।
विनम्रता
सुसंस्कारों से ही लघुता आती है जिससे प्रभुता प्रकट होती है।
विनम्रता
कभी-कभी उन लोगों से शिक्षा मिलती है, जिन्हें आप अभिमानवश अज्ञानी समझते हैं।
विनम्रता
जो जितने ऊँचे पद पर होता है, वह उतनी ही हीन भावना से भरा होता है।
विनम्रता
गलती कबूल कर लेने वाले को शर्मिन्दा नहीं होना पड़ता है।
विनम्रता
दूसरों के गुणों और अपने अवगुणों का सदैव ध्यान रखो।
विनम्रता
जो मनुष्य अपने अवगुण व दूसरों के गुण देखता है वही महान् पुरुष बनता है।
विनम्रता
हर आदमी किसी न किसी गुण में हम से बेहतर होता है, अतः उससे वह गुण ग्रहण करना चाहिए।
विनम्रता
अज्ञानी अपने आपको ज्ञानी और ज्ञानी अपने आपको अज्ञानी मानता है।
विनम्रता
गुरु और राजा के सामने ऊँचे आसन पर न बैठे और न ही उनके वचनों का तर्क द्वारा खंडन करें।
विनम्रता
परमार्थतः बड़े लोगों का अलंकार विनयातिशय है, स्नादिक तो शिलाभार है।
विनम्रता
बड़ों की यही रीति है कि मुख से बिना बोले ही व्यवहार से छोटों को विनय सिखा देते हैं।
विनम्रता
अविनयी लोगों की सम्पत्तियों का अंत विपत्ति में हो जाता है।
विनम्रता
बलवान का बल उसकी विनय शीलता में है शत्रुओं को परिवर्तित करने के लिए बुद्धिमान का शस्त्र यही है।
विनम्रता
यदि तुम छोटे बालकों के समान सरल नहीं बनोगे तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश नहीं कर पाओगे।
विनम्रता
महान् पुरुष अपनी महानता का परिचय छोटे मनुष्यों के साथ किए अपने व्यवहार से देते हैं।
विनम्रता
उस मानव का ज्ञान निन्द्य है, जिसकी चित्तवृत्ति विद्या के गर्व से दूषित है।
विनम्रता
अपनी ही पूजा कराने में खोए हुए लोग मन के अंधे और हृदय के बहरे होते हैं।
विनम्रता
मैं बड़ों की इज्जत इसलिए करता हूँ कि उन्होंने हमसे ज्यादा आराधना की है, मैं छोटों की इज्जत इसलिए करता हूँ कि उन्होंने हमसे कम अपराध किए हैं।
विनम्रता
सिक्के हमेशा आवाज करते हैं, पर नोट हमेशा शान्त रहते हैं इसलिए जब आपकी कीमत बढ़े तो शान्त रहिए, आपकी हैसियत का शोर मचाने का जिम्मा आपसे कम हैसियत वालों का है।
विनम्रता
यदि तुम भला करते हो तो अपने स्वभाव की वजह से तो फिर अहंकार क्यों?
विनम्रता
जन्म दूसरे ने दिया, नाम, शिक्षा, काम करने का तरीका दूसरे ने सिखाया, अन्त में श्मशान भी दूसरे ले जायेंगे, तुम्हारा अपना क्या है जो घमंड करते हो?
विनम्रता
अकेले बोलने से सच्ची, अच्छी और उपयोगी बातें अहंकार के कीचड़ में सनकर अग्राह्य हो जाती है।
विनम्रता
जहाँ नदी गहरी होती है वहाँ जल प्रवाह शान्त और गम्भीर होता है उसी प्रकार महान् लोग भी शांत व गम्भीर होते हैं।
विनम्रता
ज्ञानी बनना दुःख का कारण नहीं अभिमानी बनना दुःख का कारण है।
विनम्रता
बड़ा वह होता है जो छोटों को मिला लेता है, बड़ा वह नहीं होता जो छोटों को छोड़ देता है, समुद्र वह होता है जो अनेक छोटी नदियों को अपने में समा लेता है।
विनम्रता
दूसरों को भी सुनेंगे तो कुछ नया सीखने मिलेगा।
विनम्रता
प्रशंसा से ज्ञानी का विकास होता है और अज्ञानी का विनाश होता है।
विनम्रता
प्रशंसा की भट्टी में अच्छे-अच्छे पिघल जाते हैं।
विनम्रता
मनुष्य की सबसे बड़ी विडम्बना उसे झूठी तारीफ सुनकर बर्बाद होना तो पसंद है, पर सच्ची आलोचना सुनकर सम्भलना पसंद नहीं होता है।
विनम्रता
हे भगवान् यदि मुझे कुछ बनाना ही है तो शून्य बना दे ताकि जिससे भी जुड़ जाऊँ वो दस गुना बढ़ जाये।
विनम्रता
किसी का सरल स्वभाव उसकी कमजोरी नहीं होता संसार में पानी से सरल कुछ भी नहीं होता किन्तु उसका तेज बहाव बड़ी-बड़ी चट्टान के टुकड़े कर देता है।
विनम्रता
इंसान और बकरे की आदत एक जैसी होती है, दोनों ही मरते दम तक, मैं-मैं करने से नहीं हटते हैं।
विनम्रता
जो विनम्र है और नित्य ही ज्ञान, तप आदि से वृद्धों की सेवा करता है। उसके चार चीजों की वृद्धि होती है आयु, विद्या, यश और बल।
विनम्रता
चार का गौरव न करो—ज्ञान देकर, दान देकर, सम्मान देकर, अपने को बेदाग रखकर।
विनम्रता
साधु के नाम में भी सागर जुड़ा है अतः कभी अपनी मर्यादा नहीं खोना, जैसे सागर अपने अंदर के कचरे को किनारे पर फेंक देता है किन्तु अपने अन्दर के मोती को पास में रखता है वैसे ही आप भी अपने अंदर के विषय-कषाय को किनारे कर देना पर अपनी विशेषताओं को अपने मुँह से कहकर बाहर मत फेंकना।
विनम्रता
जितने ऊँचे पद पर पहुँच जाओ, उतना सँभल कर रहना पढ़ता है, ऊँचे भवनों पर सँभल कर चढ़ना क्योंकि जितने ऊँचे से गिरोगे उतनी ज्यादा चोट आयेगी, ऐसे ही जब प्रसिद्धि बढ़ने लग जाये तो सावधानी का जीवन जीना प्रारम्भ कर देना क्योंकि फिसलने के अवसर बढ़ जाते हैं।
विनम्रता
भूल होना 'प्रकृति' है मान लेना 'संस्कृति' है सुधार लेना 'प्रगति' है।
विनम्रता
माता-पिता, गुरु, अधिकारी और मूर्ख से विवाद न करें।
विनम्रता
जहाँ नदी गहरी होती है, वहाँ जल प्रवाह अत्यन्त शांत व गंभीर होता है उसी प्रकार गुणवान पुरुष शांत व गंभीर होता है।
विनम्रता
जो अहंकारी को शिक्षा देता है उसे स्वयं शिक्षा की आवश्यकता है।
विनम्रता
किसी से प्राप्त किया हुआ लाभ राई की तरह छोटा ही क्यों न हो किन्तु समझदार आदमी की दृष्टि में वह ताड़वृक्ष के बराबर हैं।
विनम्रता
महत्ता सर्वथा विनयशील और आडम्बर रहित होती है; पर क्षुद्रता सारे संसार में अपने गुणों का ढिंढोरा पीटती फिरती है।
विनम्रता
महत्ता सदैव अपने से छोटों के प्रति भी सदय और नम्र व्यवहार ही करती है; परन्तु क्षुद्रता को तो घमण्ड की मूर्ति ही समझो।
विनम्रता
बलवान मनुष्य को अनुकूल बनाये रखना चाहिए क्योंकि बड़े पुरुषों के विषय में बेंत के समान नम्र वृत्ति ही दुःख दूर करने वाली होती है।
विनम्रता
मानव प्रकृति में सबसे कठिन त्याग प्रशंसा प्राप्त करने की लालसा का त्याग करना है।
विनम्रता
अपनी प्रशंसा सुनकर जो वास्तविकता को भूल जाते हैं, वे महामूर्ख हैं। अपनी निन्दा सुनकर मनुष्य अपने आपको सम्भालता है और प्रशंसा सुनकर स्वयं को खो देता है। प्रशंसा सुनकर प्रसन्न होना एक बड़ा अवगुण है।
विनम्रता
प्रशंसा का भूखा व्यक्ति कभी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभा सकता है, अकारण प्रशंसा उसे कमजोर बना देती है।
विनम्रता
कर्म यदि अभिमान पूर्वक किया जाए तो सफल नहीं होता हैं, त्यागपूर्वक किया हुआ कर्म महान् फलदायक होता है।
विनम्रता
घमंड में चूर होकर जिन्होंने तुम्हें हानि पहुँचाई है, उन्हें अपने उच्च व्यवहार से जीत लो।
विनम्रता
अहंकार और अधिकार की भूमि पर प्रेम का बीज अंकुरित नहीं होता है।
विनम्रता
सम्मान लड़ने से नहीं लाड़ करने से मिलता है।
विनम्रता
यदि लोगों के सम्मान के लिए तेरे हृदय में स्थान है, तब तो तेरे लिए भी लोग सहयोग करने तैयार है, अन्यथा तो कुछ भी चाह करना पागलपन है।
विनम्रता
छोटे लोगों के गुण का वर्णन करने वाला अन्य कोई नहीं मिलता है अतएव वह स्वयं ही उसे कहता है अर्थात् स्वगुण वर्णन करने वाला छोटा होता है।
विनम्रता
यदि भीख माँगनी ही है तो बड़ों से आशीर्वाद, छोटों से सहयोग, संसार से प्यार, परमात्मा से दुआ माँगो।
विनम्रता
जो आदमी अपनी प्रशंसा के भूखे होते हैं वे साबित करते हैं कि उनमें योग्यता नहीं है। जिसमें योग्यता है उसका ध्यान ही प्रशंसा की ओर नहीं जाता है।
विनम्रता
जिस समय आप खुद को खुश करने के लिए किसी का 'अपमान' कर रहे होते हैं सच आप उस समय अपना सम्मान खो रहे होते हैं।
विनम्रता
विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म होता है और धर्म से सुख होता है।
विनम्रता
दूसरों को ठगने के लिए मैंने वैराग्य धारण किया, दूसरों के मनोरञ्जन के लिए धर्मोपदेश दिया, शास्त्रार्थ के लिए विद्याध्ययन किया, हे भगवन्! हास्यकारी कितनी बातें मैं आपको बताऊँ? अर्थात् मैं बहुत दोषों का भण्डार हूँ।
विनम्रता
स्वयं को सदा विद्यार्थी बनाए रखिये, ताकि ज्ञान प्राप्ति के द्वार हमेशा खुले रहें।
विनम्रता
विनय से सहित विद्या सब के मन को हरती है, जिस प्रकार मणि सहित सोने की अङ्गूठी सबके नेत्रों को आनन्दित करती है।
विनम्रता
विनय के अभाव में सर्व शिक्षा निरर्थक है, शिक्षा का फल विनय है, विनय किस अभीष्ट फल को नहीं देती है? विनय का फल सर्व कल्याण है, श्रुतकेवली अवस्था पढ़ने से नहीं तपश्चरण से आती है।
विनम्रता