Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विनम्रता

वैराग्यरङ्ग परवञ्चनाय, धर्मोपदेशो जनरञ्जनाय। वादाय विद्याध्ययनं च मेऽभूत् कियद् ब्रूबे हास्यकरं त्वमीश।।

दूसरों को ठगने के लिए मैंने वैराग्य धारण किया, दूसरों के मनोरञ्जन के लिए धर्मोपदेश दिया, शास्त्रार्थ के लिए विद्याध्ययन किया, हे भगवन्! हास्यकारी कितनी बातें मैं आपको बताऊँ? अर्थात् मैं बहुत दोषों का भण्डार हूँ।

I wore detachment to deceive others, preached dharma to entertain them, studied scriptures only for debate — O Lord, how many such laughable things shall I confess? In truth, I am a storehouse of faults.

— आराध्य सूत्र · #37

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जीवन जीने का आनंद संघर्ष में नहीं समर्पण से मिलता हैं जैसे विभीषण ने संघर्ष नहीं समर्पण किया, तो राम ने उसको लंका का राजा बना दिया, रावण ने संघर्ष किया तो मिट्टी में मिला दिया।
विनम्रता