Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Humility

विनम्रता

456 सूत्र · पृष्ठ 3 / 7

जहाँ दूसरे को समझाना कठिन हो वहाँ अपने मन को समझाना चाहिए। जीवन की सफलता का सही निशान है कि व्यक्ति कोमल बनता जाता है।
विनम्रता
सभ्यता का स्वरूप सादगी है, अपने लिए कठोरता दूसरों के लिए उदारता होना चाहिए।
विनम्रता
नम्रता कठोरता से अधिक शक्तिशाली है, जल चट्टान से अधिक शक्तिशाली है एवं प्रेम बल से अधिक शक्तिशाली है।
विनम्रता
दूसरों का सत्कार करना ही सज्जनों की सम्पत्ति होती है।
विनम्रता
विनीत व्यक्ति को धर्म-अर्थ-काम-यश और मोक्ष भी मिलता है।
विनम्रता
महात्माओं के चरित्र विचित्र होते हैं, वे लक्ष्मी की परवाह नहीं करते परन्तु लक्ष्मी के पास होने पर वे अधिक नम्र हो जाते हैं।
विनम्रता
महान् और सच्चे व्यक्ति सदा सरल और विनम्र होते हैं।
विनम्रता
जो आदमी दूसरों के भावों का आदर करना नहीं जानता है, उसे दूसरे से भी सद्भावना की आशा नहीं करनी चाहिए।
विनम्रता
दूसरों की आध्यात्मिकता का हृदय से आदर करने से ही मनुष्य में आध्यात्मिकता उत्पन्न होती है।
विनम्रता
अभिमान से किसका पतन नहीं हो सकता? नम्रता से किसकी उन्नति नहीं हो सकती ?
विनम्रता
गुणी व्यक्ति को आता देखकर प्रसन्न होना चाहिए तथा आदर करना चाहिए फिर समादृत गुणी व्यक्ति उसके सुख के लिए चेष्टा करते हैं।
विनम्रता
डॉक्टर का उचित सम्मान करो, उन लाभों के लिए जो तुम डॉक्टर से प्राप्त कर सकते हो।
विनम्रता
नम्रता से बहुत से काम बन जाते हैं, जो कठोरता से नहीं बनते हैं।
विनम्रता
स्वाभिमानी होना अच्छा है, परन्तु स्वाभिमान से विनम्रता श्रेष्ठ है।
विनम्रता
किसी महान् व्यक्ति की प्रथम परीक्षा उसकी विनम्रता है।
विनम्रता
जो काम स्त्री का सौन्दर्य करके दिखा सकता है, वही नम्रता कर सकती है उसका प्रभाव तत्काल ही दूसरों पर पड़ता है।
विनम्रता
जिनमें नम्रता नहीं आती, वे विद्या का पूरा सदुपयोग नहीं कर सकते हैं।
विनम्रता
सद्गुणों का होना ही काफी नहीं है, उन्हें व्यवस्थित रखना भी नितांत आवश्यक है, सारे सद्गुण विनय के आधीन हैं।
विनम्रता
नम्रता और प्रिय भाषण मनुष्य के आभूषण है।
विनम्रता
नम्रता बलवानों की शक्ति है और वह बैरियों का सामना करने के लिए सद्गृहस्थ को कवच का काम भी देती है।
विनम्रता
लोग व्यक्ति विशेष के आदर में भी धर्म का ही आदर करते हैं। यदि कोई व्यक्ति माने कि मेरा आदर है तो वही ठगाया गया, पतित हुआ, दुःखी हुआ, दुःखों का बीज बो चुका, लोगों की कोई हानि नहीं हुई, उन्होंने शुभोपयोग का लाभ ही उठाया है, घात तो उसी का हुआ जिसने भ्रम किया।
विनम्रता
जिनमें नम्रता नहीं आती, वे विद्या का पूरा सदुपयोग नहीं कर सकते हैं।
विनम्रता
जो व्यक्ति स्वयं अयोग्य है और अपने पुरखों के पराक्रम और सम्मान पर गर्व करता है, वह उस चोर के समान है, जो बचाव के लिए मंदिर में छिप जाता है।
विनम्रता
क्या तुम जानना चाहते हो कि बुद्धि का उथलापन किसे कहते हैं? बस उसी अहंकार को जिससे मनुष्य मन में समझता है कि ''मैं बड़ा सयाना हूँ''।
विनम्रता
जरा (बुढ़ापा) रूप को, आशा धैर्य को, मृत्यु प्राण को, क्रोध कान्ति (श्री) को, काम लज्जा को नष्ट कर देता है किन्तु अभिमान अकेला ही सब गुणों को एक साथ नष्ट कर देता है।
विनम्रता
किसी से कुछ पाना हो तो भिखारी बनकर जाओ, सम्राट् बनकर नहीं।
विनम्रता
अच्छाई का अभिमान बुराई की जड़ है।
विनम्रता
स्वार्थ और अभिमान का त्याग करने से साधुता आती है।
विनम्रता
कुदरत ने हमें ऐसा बनाया है कि हम अपनी पीठ नहीं देख सकते और उसे दूसरे ही देख पाते हैं इसलिए दूसरा जो कुछ देखता है, उससे हमें फायदा उठाना चाहिए।
विनम्रता
मनुष्य को अपनी गलती निःसंकोच स्वीकार कर लेनी चाहिए।
विनम्रता
यदि आप अच्छा बनना चाहते हो तो अपने आपको सबसे बुरा समझो।
विनम्रता
बड़ों की उस हर बात को मान लीजिए जिससे आपका अहित न होता हो।
विनम्रता
जो जितनी अधिक खुशामद चाहेगा या करावेगा उसे उतना ही परेशान होना पड़ेगा।
विनम्रता
प्रशंसा में अपने आपके स्वरूप को भूलकर व प्रशंसा करने वालों के अनुकूल चर्या बनाकर और कष्ट उठाकर व्याकुल बनना पड़ता है।
विनम्रता
दोष ही दिखाई दें तो 'अपने' और गुण दिखें तो 'पर के' तभी कल्याण हो सकता है।
विनम्रता
जब हम दूसरों का अपमान करते है तो स्वयं का सम्मान खोते हैं।
विनम्रता
कोई भी व्यक्ति परिपूर्ण या सर्वश्रेष्ठ नहीं हो सकता है।
विनम्रता
छोटों की रक्षा करो क्योंकि छोटों के होने पर ही आप बड़े कहलायेंगे।
विनम्रता
दूसरों को नालायक कहने वाला कभी लायक नहीं हो सकता है।
विनम्रता
लोहे को उसकी जंग नष्ट करती है, आदमी को उसकी सोच और घमण्ड नष्ट करता है। किसी से अपेक्षा नहीं रखना ही मेहनत का मूल्य है।
विनम्रता
स्वयं की गलतियों को स्वीकार करना स्वयं की उम्र बढ़ाना है।
विनम्रता
मूर्ख अधभरे घड़े की तरह शोर मचाते हैं, पर प्रज्ञावान गंभीर मनुष्य सरोवर की भाँति सदा शांत रहते हैं।
विनम्रता
जो आदमी अपनी भलाई चाहता है, उसे सबसे अधिक सावधानी इस बात की रखनी चाहिए कि वह महान् पुरुषों का अपमान करने से अपने को बचावे।
विनम्रता
खाली होने पर सब कुछ छोटा होता है और पूर्णता गौरव के लिए होती है।
विनम्रता
समता में प्रतिष्ठित चित्त वाले लोगों का भी विशेष व्यक्तियों के प्रति अति गौरवमय व्यवहार होता है।
विनम्रता
जब तक तुम्हें अपना सम्मान और दूसरे का अपमान सुख देता है तब तक तुम अपमानित ही होते रहोगे।
विनम्रता
जो मनुष्य अपने को बुद्धिमान मान कर निर्भय विचरता है, उसे कभी कोई सलाह नहीं देनी चाहिए क्योंकि वह दूसरे की सलाह नहीं सुनता है।
विनम्रता
श्रेष्ठ व्यक्ति का सम्मान करके उन्हें अपना बना लेना दुर्लभ पदार्थों से भी अधिक दुर्लभ है।
विनम्रता
गुरुजनों की आज्ञा पर तर्क वितर्क नहीं करना चाहिए।
विनम्रता
स्त्रियों के अंगों के समान जब अपने गुण छिपाये जाते हैं, तो वे स्पृहणीय तथा दुर्लभ हो जाते हैं। बड़े गुणों और सत्कर्मों के करने वाले लोग संसार में सर्वदा सुलभ हुआ करते हैं किन्तु उनके ज्ञाता दुर्लभ हैं।
विनम्रता
लक्ष्य भ्रष्ट जीवन केवल दयनीय ही नहीं होता, वह समाज के लिए हानिकारक भी होता है। जो मन को नहीं मार सकता है, जिसे झुकना और छोटा बनना नहीं आता है, जिसे दूसरों की सुविधा और दूसरों को निभाने की दृष्टि से झुकना और राह छोड़ना नहीं आता है वह जिन्दगी में कभी कुछ नहीं कमा पाता है उसे जिन्दगी में संतोष भी नहीं मिलता है।
विनम्रता
टूटने की अपेक्षा झुकना अच्छा है।
विनम्रता
अहंकार ही पराजय का द्वार है।
विनम्रता
प्रशंसा विवेकी को नम्र बनाती है और मूर्ख को अहंकारी बनाकर उसके दुर्बल मन को मदहोश कर देती है।
विनम्रता
मनुष्य जितने सम्मान के लायक हो, उतना ही उसका सम्मान करना चाहिए, उससे अधिक नहीं अन्यथा उसके गिरने का डर रहता है।
विनम्रता
यदि कोई मनुष्य महात्माओं का अनादर करेगा तो उनकी शक्ति से उसके सिर पर अनन्त आपत्तियाँ आ टूटेंगी।
विनम्रता
बुद्धिमान का यह कर्त्तव्य है कि अपने से बड़ी बुद्धि वाले को प्रणाम करें।
विनम्रता
स्वयं की निन्दा करना व सुनना श्रेष्ठता के लक्षण हैं।
विनम्रता
निन्दा से निष्प्रभावी रहने के लिए प्रशंसा से अप्रभावित रहिए।
विनम्रता
किसी पर कीचड़ उछालने से पहले इतना अवश्य सोच लें कि हम भी दूध के धुले नहीं हैं।
विनम्रता
अपने दोषों को स्वीकार करना एक उत्कृष्ट साहस है।
विनम्रता
अपनी निंदा सहने वाला व्यक्ति मानों विश्व पर विजय प्राप्त कर लेता है।
विनम्रता
तुम चाहे गाय के लिए पानी ही क्यों न माँगो, फिर भी जिह्वा के लिए याचना सूचक शब्दों को उच्चारण करने से बढ़कर अपमान जनक बात और कोई नहीं है।
विनम्रता
संत आदेश-उपदेश नहीं सिर्फ सन्देश देते हैं, आदेश अहंकारी देता है, उपदेश अरहंत देते हैं और सन्देश संत देते हैं।
विनम्रता
जिसने अपमान से जीना नहीं सीखा, वो सम्मान को कभी पचा नहीं पायेगा और वह जगत् सम्मानी भी नहीं बन पायेगा।
विनम्रता
यदि ज्ञानवान चारित्रवान का और चारित्रवान ज्ञानवान का अपमान करें तो दोनों को ही सम्यक्त्व रहित समझना चाहिए।
विनम्रता
हमें अपने आपको नहीं, अपने उत्तरदायित्वों को गंभीरता से लेना चाहिए।
विनम्रता
दूसरों के दोष जानना आसान है, स्वयं के दोषों को जानना कठिन है।
विनम्रता
अपमान होने पर भी मन को छोटा नहीं करना चाहिए।
विनम्रता
सबसे मुश्किल है कोई काम बगैर त्रुटि के करना और सबसे आसान है उसी काम में दूसरों की गलतियाँ निकालना।
विनम्रता
जो अपनी जरूरत के समय पर मदद माँगने में नहीं हिचके वास्तव में वही सबसे मजबूत है।
विनम्रता
''मुझे किसी के सहयोग की अपेक्षा नहीं,'' यह दावा करना उतना ही असंगत है जितनी कि अमावस की काली निशा में सूरज उगने की बात है अर्थात् सहयोग की सभी को आवश्यकता पड़ती है।
विनम्रता
स्वयं की भूल को स्वीकार करना ही अज्ञान से परदा उठाना है।
विनम्रता
छोटे बनकर बड़े काम करना श्रेष्ठ है, बड़े बनकर छोटे काम करना अच्छा नहीं है।
विनम्रता
विनीत व्यक्ति का कोई शत्रु नहीं होता है।
विनम्रता