Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

मूर्ति बनाते समय शिल्पी पहले मोटे-मोटे पत्थर को अलग करता है, बाद में छोटी हथौड़ी से छोटे-छोटे पत्थर अलग करता है, उसी प्रकार पहले मोटे-मोटे अशुभराग को त्यागना चाहिए फिर सूक्ष्म अशुभराग का त्याग करना चाहिए।

While making a statue the sculptor first removes the large chunks of stone, then with a small hammer chips off the little pieces; likewise one should first give up the gross impure attachments and then give up the subtle impure attachments.

— आराध्य सूत्र · #21

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति