Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

कलौ युगे सङ्घेशक्ति- धागे से धागा मिलकर कपड़ा और तिनके से तिनका मिलकर रस्सा बनता है जिससे बड़े-बड़े हाथी भी बाँधे जाते हैं, पाँच अगुलियाँ मिलती हैं तब ग्रास मुख में जाता है।

In the Kali age, strength lies in union: thread joined with thread makes cloth, straw joined with straw makes rope by which even great elephants are bound; only when five fingers come together does a morsel reach the mouth.

— आराध्य सूत्र · #1

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति