Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

हे प्रभो! आप देना चाहते हैं तो मुझे कोई चाह उत्पन्न न हो क्योंकि स्वरूप से बढ़कर कुछ नहीं है।

O Lord! If You wish to give me anything, let no desire arise in me, for there is nothing greater than the true Self.

— आराध्य सूत्र · #5985

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति