Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

भोगभूमि से कर्मभूमि के आने पर जीवों को षट्कर्म का उपदेश देकर कर्मयुग का प्रवर्तन कर विचलित प्राणियों को स्थिरता देने के कारण आदिनाथ प्रथम वंदनीय हैं।

When the age of enjoyment gave way to the age of labour, by teaching beings the six occupations, inaugurating the era of action and giving stability to the bewildered creatures, Adinath is the first to be revered.

— आराध्य सूत्र · #5981

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति