Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संगति

उस जाति की स्थिति कितनी दयनीय है जो परस्पर वैमनस्य के कारण कई सम्प्रदायों में बँट चुकी है और हर सम्प्रदाय स्वयं को एक जाति मानने लगा है।

How pitiable is the state of that community which, through mutual enmity, has split into many sects, and each sect has begun to regard itself as a separate community.

— आराध्य सूत्र · #6019

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संतों की संगति करके नर देह सार्थक कर लेना चाहिए। आसन से रोगों का नाश और प्राणायाम से पापों का नाश और योगी के मन के विकार प्रत्याहार से दूर हो जाते हैं। धारणा से धैर्य आता है तथा अद्भुत चैतन्य की प्राप्ति होती है समाधि से शुभाशुभ कार्यों को त्याग कर साधक मोक्ष को प्राप्त करता है।
संगति
जब कभी अपने हृदय को प्रफुल्लित करना चाहो, अपने निकटवर्तियों के शुभ गुणों को चित्त में लाओ, जैसे कि एक की स्फूर्ति, दूसरे की विनम्रता, तीसरे की उदारता, चौथे की ऐसी ही कोई अच्छाई अर्थात् गुणों की ओर दृष्टि होने से मन प्रसन्न रहता है।
संगति