Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Time

समय

176 सूत्र · पृष्ठ 2 / 3

जीव की बाल्यावस्था को ज्ञान हीन होने के कारण पशुता-सी और वृद्धावस्था को मृत्यु तुल्य ही समझना चाहिए। यदि विवेक सम्पन्न हो तो युवावस्था ही उसका जीवन है।
समय
देर करना सदैव खतरनाक है और किसी भव्य योजना को टालते रहना प्रायः उसे नष्ट करना होता है।
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जिस समय जो कार्य करना उचित हो, उसे उसी समय शंका रहित होकर शीघ्र करना चाहिए क्योंकि समय पर हुई वर्षा फसल की पोषक होती है असमय की वर्षा फसल विनाशिनी होती है।
समय
मैंने समय नष्ट किया और समय अब मुझे नष्ट कर रहा है।
समय
क्या तुम्हें अपने जीवन से प्रेम है? तो समय को व्यर्थ मत गँवाओ क्योंकि जीवन समय से बना है। आनन्द और कर्म से घंटे छोटे प्रतीत होते हैं।
समय
ठीक समय पर किया हुआ थोड़ा सा भी कार्य बहुत उपकारी होता है और समय बीतने पर किया हुआ महान् उपकार भी व्यर्थ हो जाता है।
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आयु का एक क्षण भी संसार के सब रत्नों के बदले भी नहीं पाया जा सकता है, उस आयु को यदि कोई व्यर्थ में खोता है, तो अहो! बड़ा भारी प्रमाद है।
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महान् पुरुष अपने कामों में काल का अतिक्रमण नहीं होने देते हैं।
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आयु का एक क्षण भी करोड़ों स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त नहीं किया जा सकता है, उसे यदि निरर्थक बिता दिया तो उससे बड़ी हानि क्या है?
समय
एक-एक क्षण का सदुपयोग कर विद्या का और एक-एक कण की सुरक्षा कर धन का संचय करना चाहिए क्योंकि क्षण का त्याग करने से विद्या कैसे प्राप्त हो सकती है और कण का त्याग करने पर धन कैसे प्राप्त हो सकता है ?
समय
प्रथम प्रहर में दुनिया, द्वितीय प्रहर में भोगी, तृतीय प्रहर में चोर, अंतिम प्रहर में योगी जागता है, देर से सोना, देर तक सोये रहना दरिद्रता का कारण है, जल्दी सोना, जल्दी उठना अच्छी हेल्थ और वेल्थ का कारण है, जो हर रोज उगते सूरज को देखते हैं, उनका पूरा दिन उगा हुआ रहता है, जो सूर्योदय के बाद भी सोये पड़े रहते हैं उनका भाग्य भी सो जाता है।
समय
कल का दिन किसने देखा है, आज का दिन भी खोये क्यों, जिन घड़ियों में हँस सकते हैं, उन घड़ियों में रोये क्यों?
समय
जो समय चिन्ता करते बीता वह समझो कूड़े दान में डाल दिया और जो समय चिन्तन में लगा समझो कि वह ब्याज सहित लौटाने वाली बैंक में जमा हो गया है।
समय
समय के अच्छे उपयोग के लिए अच्छी नींद लेना आवश्यक है।
समय
वक्त, दोस्त और रिश्ते मुफ्त में मिलते हैं पर खो जाने पर इनकी कीमत पता चलती है।
समय
अतीत से सीखो, वर्तमान का सदुपयोग करो, भविष्य के प्रति आशावान रहो।
समय
जीवन कितना ही बड़ा हो पर समय की बर्बादी से बहुत छोटा हो जाता है।
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वक्त और दौलत में इतना अन्तर है कि आपको पता होता है कि दौलत कितनी है पर यह पता नहीं होता है कि वक्त कितना बाकी है।
समय
वक्त कब क्या रंग दिखायें हम नहीं जानते वरना जिस 'राम' को राज्य मिलना था वनवास न मिलता।
समय
वर्तमान परिणति हमारे भूत और भविष्य को बता देती है।
समय
भूत को याद कर भविष्य को खराब मत करो सिर्फ वर्तमान में जियो।
समय
अविवेकी प्राणी धन के कमाने में तन को खराब कर लेता है फिर तन को सही करने के लिए धन को नष्ट कर देता है और मरते दम तक धन का सुख नहीं ले पाता है कभी अस्पताल में जाकर मरीज को देखना जो डॉक्टर से कहता है जितना पैसा चाहिए हो ले लो पर कुछ क्षण का जीवन बचा लो जबकि उसने पूरी पर्याय की कीमत ही नहीं की, अधिकतर समय गप्पों में, पेपर पढ़ने में, टी.व्ही. देखने में, बोलने में खो दिया, पूछा तो कहा समय पास कर रहे हैं।
समय
कुछ वृक्षों में काँटे होते हैं, जो कहते हैं संभलकर चलो, तो कुछ घड़ियों में भी कांटे होते है जो कहते हैं समय पर चलो।
समय
बचपन में घड़ी नहीं थी पर समय था, आज घड़ी है पर समय नहीं है।
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वर्तमान की पर्याय के सुख दुःख मत देखो क्योंकि वह पर्याय बहुत छोटी है भविष्य के बारे में सोचो क्योंकि वह बहुत बड़ा है।
समय
जिस किसी को गम्भीर और ठोस साहित्य सेवा करनी है, उसे अपने समय की बचत करनी पड़ेगी, चाहे आगंतुकों के साथ उसे अशिष्टता का बर्ताव ही करना पड़े।
समय
सब कुछ नष्ट करने वाला काल भी कवियों की सूक्तियों को नष्ट नहीं करता है।
समय
बुद्धिमान बनने के लिए आगामी कल तक टाल-मटोल न करें, हो सकता है कि तुम्हारे लिए कल का सूर्य कभी उदित ही न हो।
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जीवन को सफल और सरल बनाने हेतु प्रत्येक तरह के अन्तराल का उचित समय पर उपयोग होना अत्यन्त आवश्यक है।
समय
दुनिया में सर्वोत्तम दिन है–आज, अच्छे काम के लिए सबसे उपयुक्त समय है–अभी। व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल है–समय की बर्बादी। दोस्ती में सबसे बड़ी बाधा है–अधिक बोलना। दुनिया में सबसे बुरी भावना है–ईर्ष्या। दुनिया में सबसे बड़ा दिवालियापन है–निरुत्साह होना। दुनिया का खूबसूरत पौधा प्रेम का जो जमीन पर नहीं दिल में उगता है।
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अगर आपको अपने जीवन से सच्चा प्रेम है तो समय के मूल्य को समझो।
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सुकाल में किया कार्य सुफल देता है अकाल का कार्य कुफल देता है।
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जो समय बचाना जानता है वह अनावश्यक बात एक भी नहीं करेगा।
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समय ही अपना धन है।
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बुद्धिमानों का समय काव्य और शास्त्र के अध्ययन में जाता है, और मूर्खों का समय व्यसन, निद्रा और कलह में जाता है।
समय
दिन में ऐसा काम करना चाहिए जिससे रात्री में चैन की नींद आए, आठ महीने ऐसा काम करना चाहिए जिससे वर्षाऋतु में एक जगह रहकर धर्मध्यान कर सकें, पूर्व अवस्था में ऐसा काम करना चाहिए जिससे वृद्धावस्था में धर्मध्यान कर सकें और 'पूरे जीवन ऐसा काम करना चाहिए जिससे भविष्य सुखी हो जाए।'
समय
बीती बात को भूलने में ही भलाई है, वरना वर्तमान में जीना दूभर हो जायेगा और भविष्य असम्भव लगने लगेगा।
समय
भूत का चिन्तन, भविष्य की चिन्ता- संसार के लिए सर्वाधिक महत्त्व इस बात का है, कि आप इस समय क्या हैं, न कि आप क्या थे और क्या होंगे, वर्तमान का सदुपयोग करें व भूत की घटना से शिक्षा लें।
समय
मैं मानता हूँ कि समय अमूल्य है, पर आपको भी मानना पड़ेगा कि जीवन बहुमूल्य है।
समय
समय बर्बाद मत कीजिए अन्यथा समय आपको बर्बाद कर देगा।
समय
परिवर्तनों को अपनाइए- हम एक घण्टे पूर्व जो थे वह अब नहीं हैं, परिवर्तनों से घबराने की बजाय उनका आदर करना चाहिए और लाभ के लिए उनका उपयोग करना चाहिए।
समय
समय न होने का बहाना मत बनाइये- सबसे अधिक व्यस्त व्यक्ति के पास सबसे ज्यादा समय होता है, बस श्रद्धा और इच्छा शक्ति होना चाहिए पर्याप्त समय निकल आयेगा।
समय
समय की पाबन्दी कीजिए बैठकों को निश्चित समय पर कीजिए।
समय
हर समय इतने व्यस्त रहें कि चिन्ता करने का समय ही न मिले, समय का धन की तरह सदुपयोग करें।
समय
जो समय को बर्बाद करता है समय उसे बर्बाद कर देता है, अतः समय का सदुपयोग ही आत्मोत्थान का उपाय है।
समय
एक मिनट देर से पँहुचने से एक घण्टा पहले पहुँचना अच्छा है।
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वक्त की धार बहुत तेज होती है, वक्त और सागर की लहरें किसी की प्रतीक्षा नहीं करती हैं।
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सन्त और बालक वर्तमान में जीते हैं, बाकी सब भूत-भविष्य में जीते हैं इसलिये अध्यात्म से रीते हैं।
समय
बालों को काला करके बुढ़ापे को ढाका तो जा सकता है पर बुढ़ापे से बचा नहीं जा सकता है।
समय
समय की कमी नहीं सम्यक् योजना की कमी होती है। जहाँ समझने की गुञ्जाइश न हो वहाँ मौन रहना श्रेष्ठ है।
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मूल्यवान पूरा जीवन ही नहीं महत्त्वपूर्ण प्रसङ्ग या क्षण भी होता है।
समय
समय बदलने पर लोगों की नजर भी बदल जाती है।
समय
'यह भी बीत जायेगा' यह ऐसा स्वर्णिम सूत्र है, जो निराशा के अंधेरे में आशा का चिराग जला देता है।
समय
करने योग्य काम बहुत है, जिन्दगी बहुत छोटी है, इसलिए हर क्षण सार्थकता से जियें।
समय
समय का ज्ञाता वही होता है जो समय निरर्थक नहीं खोता है और न दुरुपयोग करता है।
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अतीत को वर्तमान नहीं बनाया जा सकता, पर उससे अनुभव अवश्य लिया जा सकता है।
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तीन चीजें- समय, मृत्यु और ग्राहक ये किसी की प्रतीक्षा नहीं करते हैं।
समय
बचपन में अध्ययन, जवानी में अर्जन, बुढ़ापे में चिन्तन ये तीन बातें याद रखना चाहिए।
समय
समय के पैर नहीं पंख होते हैं, वह चलता नहीं उड़ता है, अतः समय की कीमत करनी चाहिए।
समय
पञ्चमकाल में उनञ्चास विपरीतताएँ- 1.राजा-लोभी, 2.मित्र-विश्वासघाती, 3.पुत्र-अर्थलोभी, 4.नारी-दुश्चरित्र, 5.भाईबन्धु-विपरीत, 6.मन्त्री-असन्तुष्ट, 7.विद्वान-धनहीन, 8.पापीलोग-सुखी, 9.कुदेवों की पूजा, 10.पति-क्रोधी, 11.नगरी-प्रजाहीन, 12.देह-व्याधि पीड़ित, 13.गँवार-सर्वकलावान, 14.कायर-सुभट, 15.क्षमावान-निर्दयी, 16.शूद्र-बलवान, 17.अकाल मृत्यु, 18.मूर्ख-अहङ्कारी, 19.स्नेही-दुर्जन, 20.वैश्य-कपटी, 21.राजा-नीच, 22.सज्जन-विरोधी, 23.राजा-स्व स्थान हीन, 24.वर्षा-अल्प, 25.मनुष्य-वचनहीन, 26.मन्त्री-बुद्धिहीन, 27.तापसी-दया हीन, 28.भट्टारक-तामसी, 29.वृक्ष-फल रहित, 30.कुंवारी कन्या-चञ्चल, 31.दासी-आज्ञाहीन, 32.राजपुत्र-विवेकहीन, 33.शूद्र-विवेकी, 34.किसान-दुःखी, 35.पुरूषार्थ-हीन-सुखी, 36.अकाल, 37.विपरीत ऋतुयें, 38.स्वप्रशंसा, 39.परनिन्दा, 40.वेश्या-लज्जालु, 41.राजा-गजहीन, 42.अशुद्धपाठ, 43.लोभी-विप्र, 44.माता-कुटिल, 45.कुटिलता पूर्ण दया, 46.अनङ्ग क्रीड़ा, 47.उच्चकुलीन-निर्लज्ज, 48.भीलों के गाँव में व्यापार और 49.नीच जाति के लोग भजन गायेंगे।
समय
पञ्चम काल में मनुष्य में बीस दोष- 1.कुण्ठित, 2.लोभी, 3.क्रोधी, 4.कृतघ्न, 5.पापिष्ट, 6.दुष्ट, 7.रूखे, 8.क्रूर, 9.जड़, 10.मूर्ख, 11.मर्यादा रहित, 12.अधार्मिक, 13.हिंसा, 14.चोरी, 15.असत्यवादी, 16.कातर, 17.परनिन्दक, 18.चुगलखोर, 19.मानी और 20.धूर्त।
समय
मनुष्य कृश, रोगाक्रान्त, बाधाओं से युक्त, इस काल में ईति-भीति, चोरों का भय रहेगा, पृथ्वी रूखी रहेगी, व्याधों द्वारा नारी हरण, सर्प, कीड़े, मृगादि का भय होगा।
समय
(जीवन में परिवर्तन) आयु कम है, काम बहुत है, शरीर क्षीण हो रहा है, ऊर्जा कम हो रही है, तेज घट रहा है, तुमको जो कुछ भी जप, तप, व्रत, उपवास, ध्यान, ज्ञानार्जन, परोपकार, दान, पुण्य करना है जल्दी कर लो वरना समय बीतने पर पश्चात्ताप के अलावा कुछ हाथ नहीं लगेगा, जीवन प्रदर्शन से नहीं बदलेगा, रोने-धोने से नहीं बदलेगा, ध्यान रखो जीवन जब भी बदलेगा तुम्हारे दृढ़ सङ्कल्प, समर्पण, श्रद्धा एवं कठोर परिश्रम से बदलेगा, सत्य एवं साधना से बदलेगा। कुछ सङ्कल्प लीजिए और अपने जीवन को परिवर्तन की दिशा में बढ़ाने का प्रयास कीजिए।
समय
क्या आपकी आँख सूर्योदय के पहले खुल जाती है?
समय
क्या आप समय का पूर्ण सदुपयोग करते हैं?
समय
यह विवेक का नहीं विज्ञापन का युग है, चिन्तन का नहीं चाटुकारिता का युग है। चारित्रवान मनीषियों का नहीं चारित्रहीन चमचों का युग है। सत्य शोधकों का नहीं सत्ता लिप्सुओं का युग है। आचार का नहीं प्रचार का युग है। दूरदृष्टि का नहीं दूर दर्शन का युग है। शब्द साधना का नहीं शब्द जाल का युग है। प्रज्ञा पुरूषों का युग नहीं पण्डितों का युग है। परमेष्ठियों का युग नहीं पाखण्डियों का युग है।
समय
घड़ी (WATCH) का रहस्य- W=Word-शब्द-हर समय जो शब्द बोलते हो वह हित-मित-प्रिय हो। A=Action-चेष्टा- हर समय जो कार्य करते हो उसे ठीक और सहजता से करो। T=Time-समय-हाथ से निकला समय वापस नहीं आता, हर क्षण का महत्व समझें। C=Character-चरित्र- अपना चरित्र अच्छा रखो कमाने में समय लगता है खोने में नहीं। H=Health-स्वास्थ्य-स्वास्थ अच्छा रखों।
समय
हाय कुछ न कर सके न पीर पर की हर सके, रात बात में गयी प्रात खात में गया। फिर हमारी जिन्दगी से एक दिन निकल गया, जागरण के कोष से एक दिन निकल गया।। जैसे-जैसे श्वाँस कम हो रही है देह से, मोह त्यों-त्यों बढ़ रहा है, आदमी की गेह से। भावना के द्वार पर साधना के हाट पर, रात सोच में गयी प्रात खात में गया। फिर हमारी जिन्दगी से एक दिन निकल गया, जिन्दगी के कोष से एक दिन निकल गया।। इसलिये सुधार कर आज का न काल कर, हँस रही थी जो कली देखते ही ढह गयी। रात चाह में गयी प्रात आह में गया, फिर सरस की जिन्दगी से एक दिन निकल गया।।
समय
जो वर्तमान में जीता है वह वर्धमान हो जाता है।
समय
जो भूत और भविष्य की सोचता है उसका वर्तमान का सुख चला जाता है।
समय
जो रहा किसी दिन बादशाह वह पथ का आज भिखारी है, जो रोटी को मुँहताज रहा वह बना राज दरबारी है। जिनकी पैदाइश की खुशियाँ प्रातः आकाश गुञ्जाती थीं, कुछ देर बाद देखा मैंने वे हा हा कार मचाती थीं।।
समय
जो आज एक अनाथ है, नरनाथ कल होता वही। जो आज उत्सव मग्न है, कल शोक कर रोता वही।
समय
कारज धीरे होत है, काहे होत अधीर। समय पाय तरुवर फलें, केतेक सींचों नीर।।
समय
आदमी की जात की बस यही औकात है। चार दिना की चाँदनी फिर अन्धेरी रात है।।
समय
दिन कब बीते हैं, सिर्फ हम बीत जाते हैं। घड़े फूटे भरे हों तो, खुदरीत जाते हैं।।
समय