Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Effort & Diligence

पुरुषार्थ

637 सूत्र · पृष्ठ 3 / 9

काम करने से जीवन को शक्ति मिलती है और संयम से जीवन को सुन्दरता प्राप्त होती है।
पुरुषार्थ
पुरुषार्थ हीन भाग्य अथवा भाग्यहीन पुरुषार्थ इन दो ही कारणों से मनुष्य का उद्योग निष्फल होता है। अतः पुण्य कमाओ साथ में पुरुषार्थ करो।
पुरुषार्थ
जो पुरुषार्थ को छोड़कर भाग्य भरोसे बैठते हैं वे अपने ही शत्रु हैं और धर्म अर्थ काम व मोक्ष का नाश करते हैं।
पुरुषार्थ
जो श्रेष्ठ बनने का पुरुषार्थ करता है वह स्वमेव ज्येष्ठ बन जाता है।
पुरुषार्थ
भाग्य पर नहीं पुरुषार्थ और चारित्र पर निर्भर रहो।
पुरुषार्थ
कार्य की सिद्धि समय पर किए गये सम्यक् पुरुषार्थ से होती है।
पुरुषार्थ
भोजन मिलता भाग्य से है पर पेट भरता पुरुषार्थ से ही है।
पुरुषार्थ
भगवान् की पूजा ही न करें अपितु भगवान् बनने का पुरुषार्थ भी करें।
पुरुषार्थ
त्याग वेष की ओर तुम्हारा प्रयास शान्ति के लिए था। इस समय कहाँ हो? विचार करो और सर्व पुरुषार्थ से अपने उद्देश्य पर पहुँचो।
पुरुषार्थ
जिसमें आत्मा का हित हो वह पुरुषार्थ है, लौकिक कार्यों का प्रयोग यथार्थ पुरुषार्थ नहीं है। ''सदाचार से आगे बढ़ना पुरुषार्थ है।''
पुरुषार्थ
पुरुषार्थ बिना कोई जीव एक क्षण नहीं रहता, चाहे सीधा पुरुषार्थ करे या उल्टा क्योंकि पुरुषार्थ यानि वीर्य गुण है गुण का अभाव होने पर गुणी का अभाव हो जाता है।
पुरुषार्थ
पुरुषार्थ कर्माधीन नहीं क्योंकि वह आत्मा का गुण है, कर्म के उदय में वह गुण विकृत रूप परिणमता है और कर्म के अभाव में स्वभाव के अनुकूल परिणमन करता है।
पुरुषार्थ
पुरुषार्थ हीन भाग्य भरोसे चलने वाले व्यक्ति का विनाश अवश्यंभावी है।
पुरुषार्थ
पुरुषार्थ की युक्ति से मिलती बंधनों से मुक्ति।
पुरुषार्थ
भाग्य भी मनुष्य के पुरुषार्थ से बदलता है, अतः पुरुषार्थ करते रहना चाहिए।
पुरुषार्थ
जो लोग पुरुषार्थ का महत्व स्वीकार नहीं करते हैं, उन्हें सांसारिक कार्यों में भी पुरुषार्थ छोड़ देना चाहिए, यदि नहीं छोड़ते हैं, तब उन्हें मोक्षमार्ग में भी पुरुषार्थ करना चाहिए अन्यथा लोमड़ी जैसे खट्टे अंगूर हैं।
पुरुषार्थ
जो लोग भवितव्य पर विश्वास कर पुरुषार्थ करना छोड़ देते हैं, उन्हें भवितव्य पर विश्वास नहीं हैं क्योंकि भवितव्य में भाग्य और पुरुषार्थ दोनों गर्भित हैं, दोनों का विश्वासी ही भवितव्यता का विश्वासी माना जाता है।
पुरुषार्थ
यदि कोई वस्तु प्राप्त करनी है तो अपने को उसके योग्य बनाना चाहिए।
पुरुषार्थ
बेहतर बनने के किसी भी अवसर को हाथ से न जाने दो।
पुरुषार्थ
गुलाब की तरह महकना है, तो पहले चिराग की तरह जलना पड़ेगा।
पुरुषार्थ
अपने कार्य को इतनी लगन से कीजिए कि असफलता असम्भव हो जाए।
पुरुषार्थ
एक बार की असफलता आधी विजय है क्योंकि अभ्यास आदमी को पूर्ण बनाता है।
पुरुषार्थ
असफलता से मत घबराइये, आखिर बिना गिरे क्या कोई चलना सीख लेता है?
पुरुषार्थ
प्रमाद की स्थिति सोने (शयन) के बराबर है।
पुरुषार्थ
कठिनाइयों से घबराकर कभी अपना आत्मविश्वास नहीं खोना चाहिए।
पुरुषार्थ
असंभव को संभव कर दिखाने और पर्वतों को भी हिला देने की शक्ति सिर्फ दृढ़ संकल्प व आत्म विश्वास से ही आती है।
पुरुषार्थ
उम्मीदों को मत छोड़िये यही जीने का सबसे बड़ा सहारा है।
पुरुषार्थ
आपत्तियों पर विजय पाना जीवन का सबसे बड़ा आनंद है।
पुरुषार्थ
तू विशाल संसार-सागर तैर चुका अब किनारे आकर क्यों अटक रहा है, उस पार पहुँचने के लिए पूरी शक्ति से शीघ्रता कर। हे साधक! क्षण-मात्र भी प्रमाद न कर।
पुरुषार्थ
सच्चा पुरुषार्थी वही है जो बार-बार असफल रहने पर भी अपने प्रयत्न में शिथिलता नहीं आने देता और असफलता के बाद नए उत्साह से सफलता के लिए उद्यम करने लगता है।
पुरुषार्थ
मानव जीवन में लगन बड़ी महत्त्व की वस्तु है जिसमें लगन है, वह बूढ़ा भी जवान है जिसमें लगन नहीं, वह जवान भी मृतक है।
पुरुषार्थ
उदासीन और उत्साहहीन व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर पाता है।
पुरुषार्थ
उत्साहहीनता एक ऐसा भयानक रोग है, जिससे आपका मस्तिष्क विषमय होकर अपनी योग्यता का नाश कर बैठता है।
पुरुषार्थ
यह मानना कि हम कुछ नहीं कर सकते, सबसे बड़ी कायरता है, इसे त्यागो और पुरुषार्थ को जागृत करो, फिर देखोगे कि तुम्हारी उन्नति तुम्हारे हाथ में है।
पुरुषार्थ
कार्यकुशल व्यक्ति के लिए यश और धन की कमी नहीं है।
पुरुषार्थ
अब कलम नहीं, कदम उठाना है, कदम बढ़ाओ मंजिल पाओ।
पुरुषार्थ
एक समय में एक ही काम कीजिए ताकि वह पूरी एकाग्रता से सम्पन्न हो सके।
पुरुषार्थ
इससे पहले कि आप कल पर काम का अतिरिक्त बोझ डालें, उसे आज ही करना शुरू का दीजिए।
पुरुषार्थ
कार्य की अधिकता से उकताने वाला व्यक्ति कभी कोई बड़ा कार्य नहीं कर सकता है।
पुरुषार्थ
अच्छे कार्य करने हेतु किसी शुभावसर की राह मत देखो अपितु छोटे-छोटे अवसरों से ही लाभ उठाओ।
पुरुषार्थ
साधारण कामों को असाधारण तरीके से करके ही आप दुनिया का ध्यान खींच सकते हैं।
पुरुषार्थ
काम के बोझ से कोई मर नहीं जाता है, मौत तो भय के कारण आती है।
पुरुषार्थ
जो व्यक्ति काम करने में प्रसन्नता अनुभव करता है वह बेकारी के दलदल में नहीं फँसता है।
पुरुषार्थ
प्रत्येक अच्छा कार्य पहले असंभव नजर आता है।
पुरुषार्थ
हमारी कोशिशों का फूल उपलब्धि के रूप में खिलता है।
पुरुषार्थ
आत्म विश्वास को ही अपना सच्चा मित्र बनाइये।
पुरुषार्थ
हर मंजिल के रास्ते होते हैं और हर रास्ते पर मुश्किलें होती हैं पर मन में यदि उमंग-उत्साह आत्म विश्वास हो तो जीत निश्चित होती है।
पुरुषार्थ
त्रुटियाँ तो केवल उसी से नहीं होंगी जो कभी कोई काम करे ही नहीं।
पुरुषार्थ
खाने और सोने का नाम जीवन नहीं है, जीवन नाम है सदैव आगे बढ़ते रहने की लगन का।
पुरुषार्थ
जीवन में आई चुनौतियों को स्वीकार करने वाले ही सफल व सही जीवन जी पाते हैं।
पुरुषार्थ
जिन्दगी उसकी नहीं जो जिन्दगी से घबराते हैं, बल्कि जिन्दगी उसकी है, जो जिन्दगी से टकराते हैं।
पुरुषार्थ
अंत तक सक्रिय रहने में ही जीवन की सार्थकता है।
पुरुषार्थ
दास होना बुरा नहीं परन्तु दास रहकर ही मर जाना अवश्य बुरा है।
पुरुषार्थ
मौके का लाभ नहीं उठाना ही प्राणी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।
पुरुषार्थ
याद रखें, महान् विजेता वही होते हैं, जो किसी एक उद्देश्य को लेकर काम करते हैं और जिनकी दृढ़ता, जिनका संकल्प अविभाज्य है।
पुरुषार्थ
गाय दूध देती नहीं निकालना पड़ता है, ऐसे ही जीवन में महान् कार्य स्वतः ही सम्पन्न नहीं होते, उनके लिए प्रयत्न व प्रयास करना पड़ता है।
पुरुषार्थ
पुरुषत्व तो परिस्थिति को अपने अनुकूल बनाने में है।
पुरुषार्थ
अपने सामने एक ही साध्य रखना चाहिए उस साध्य के सिद्ध होने तक दूसरी किसी बात की ओर ध्यान नहीं देना चाहिए दिन-रात सपने तक में उसी की धुन रहे तभी सफलता मिलती है। स्मरण रखो! सत्कर्मों से, समय से पहले व भाग्य से अधिक भी मिल सकता है।
पुरुषार्थ
अपने बहुमूल्य समय का एक-एक क्षण परिश्रम में व्यतीत करना चाहिए, ऐसा करने से कोई क्षण ऐसा नहीं बचता जब हमें पछतावा हो।
पुरुषार्थ
उत्तम पुरुषों की यह रीति है कि वे किसी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ते हैं।
पुरुषार्थ
उन्नति प्राप्त करने का सर्वोत्तम उपाय स्वयं का परिश्रम होता है।
पुरुषार्थ
परिश्रम वह चाबी है जो किस्मत का दरवाजा खोल देती है।
पुरुषार्थ
श्रम और उद्योग चुंबक के समान हैं जो सब अच्छे-अच्छे पदार्थों को पास खींच लेते हैं। जो अवसरों का उपयोग करना जानते हैं, वे उन्हें पैदा भी कर सकते हैं।
पुरुषार्थ
सतत् परिश्रम तथा साहस ही सफलता की कुंजी है।
पुरुषार्थ
भाग्य के भरोसे जीने वाला कभी भी भाग्यवान नहीं बन सकता किन्तु पुरुषार्थ करने वाला जरूर परमात्मा बन जाता है।
पुरुषार्थ
ज्येष्ठ बनने के लिए नहीं अपितु श्रेष्ठ बनने के लिए श्रम करना पड़ता है क्योंकि जो श्रेष्ठ बन जाता है, वह ज्येष्ठ भी बन जाता है।
पुरुषार्थ
बिन पुरुषार्थ किए भाग्य को दोष देना ज्ञानियों का नहीं आलसियों का काम है।
पुरुषार्थ
भाग्य (दैव) के अनुकूल होने पर भी यदि मानव उद्योगहीन (आलसी) है तो उसका कल्याण नहीं हो सकता है।
पुरुषार्थ
स्वयं के प्रयत्न के बिना मानव की उन्नति असम्भव है इसलिए मानव को अपना मित्र बनकर परिश्रम से अपनी उन्नति करनी चाहिए।
पुरुषार्थ
जो सिर्फ बहाने बनाने में माहिर होते हैं, वे किसी और चीज में माहिर नहीं होते हैं। यदि परिस्थितियाँ अनुकूल हैं तो सीधे अपने ध्येय की ओर चलो, लेकिन यदि परिस्थितियाँ अनुकूल न हों तो उस मार्ग का अनुसरण करो, जिसमें सबसे कम बाधा आने की सम्भावना हो।
पुरुषार्थ
संसार की सारी वस्तुएँ ठोकर लगने से टूटती हैं, पर एक मनुष्य ही ऐसा प्राणी है जो ठोकर लगने से बनता है। ठोकरों से घबराओ मत, इनसे शिक्षा लो, बोध लो, ज्ञान लो, ठोकरें मनुष्य को अनुभवी बनाती हैं और ठोकर खाकर ही व्यक्ति ठाकुर बनता है।
पुरुषार्थ
मनुष्य को कर्म का अधिकार इसलिए दिया गया है कि वह प्रत्येक वांछित वस्तु अपने पुरुषार्थ द्वारा प्राप्त करे किन्तु मनुष्य हर वस्तु परमात्मा से माँगता है यह कर्म और परमात्मा दोनों का अपमान है।
पुरुषार्थ
भागने वाले के पीछे भय रहता है, दौड़ने वाले के आगे एक उपलब्धि होती है, अतः भागो मत दौड़ना सीखो लक्ष्य मिलेगा।
पुरुषार्थ
सौभाग्य और दुर्भाग्य मनुष्य की दुर्बलता के नाम हैं, मैं तो पुरुषार्थ को ही सबका नियामक समझता हूँ, पुरुषार्थ ही सौभाग्य को खींच लाता है।
पुरुषार्थ
संसार में ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसके जीवन में भाग्योदय का अवसर न आया हो लेकिन जब मनुष्य उसका स्वागत करने को तैयार नहीं होता तब अवसर उलटे पैर लौट जाता है।
पुरुषार्थ