Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Effort & Diligence

पुरुषार्थ

637 सूत्र · पृष्ठ 4 / 9

मौके का लाभ न उठाना ही प्राणी का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है।
पुरुषार्थ
आपका भाग्य आपके हाथ है, जो शक्ति और सहायता आप चाहते हो वह सब आपके भीतर मौजूद है इसलिए अपना भाग्य आप ही बनाओ।
पुरुषार्थ
जब तक मनुष्य उद्योग करता है उससे भूल होना संभव है।
पुरुषार्थ
मंजिल कागज पर लिखने से नहीं कदम बढ़ाने से मिलती है।
पुरुषार्थ
जल एक स्थान पर ठहरे रहने से बदबूदार हो जाता है और दूज का चन्द्रमा यात्रा के कारण पूर्णचन्द्र बन जाता है।
पुरुषार्थ
देश के युवक चाहें तो वे बड़े-बड़े सत्कार्य आसानी से सम्पन्न कर सकते हैं।
पुरुषार्थ
किसी भी कार्य को योजना बनाकर करने वाला व्यक्ति सफल होता है।
पुरुषार्थ
मेहनत से मत कतराइये क्योंकि विकास के शिखरों तक पहुँचने का रास्ता मेहनत ही है।
पुरुषार्थ
अपना रास्ता स्वयं बनाकर चलने वाला शेर के समान शक्तिशाली होता है।
पुरुषार्थ
शिखर की ओर जाने वाले रास्ते पर बहुत अधिक भीड़ नहीं रहती है।
पुरुषार्थ
लक्ष्य पाना है तो पूरी ताकत से काम करो।
पुरुषार्थ
अनुकूलता हो या प्रतिकूलता महापुरुष लक्ष्य की धुन में बढ़ते जाते हैं, यही कारण है कि सफलता पग-पग पर उनके कदम चूमती है।
पुरुषार्थ
अपने लक्ष्य को न भूलो, अन्यथा जो कुछ भी मिलेगा उसी में संतोष करने लगोगे।
पुरुषार्थ
महानता की आकांक्षा करने से हमारी आत्मा की सर्वोत्कृष्ट शक्तियों का विकास होता है।
पुरुषार्थ
मानव की महिमा इस बात में नहीं है कि वह कभी गिरे नहीं, बल्कि इस बात में है कि हर बार गिरने पर उठ खड़ा हो।
पुरुषार्थ
आत्मविश्वास को ही अपना सच्चा और अच्छा मित्र बनाइये।
पुरुषार्थ
हर मंजिल के रास्ते होते हैं और हर रास्ते पर मुश्किलें होती हैं, पर मन में यदि उमंग-उत्साह-आत्मविश्वास हो तो जीत निश्चित होती है।
पुरुषार्थ
किसी सत्यकार्य को करने के लिए जो यह कहते हैं कि हमारे पास समय नहीं है, वे वास्तव में आलसी हैं, समय हर मनुष्य के पास है पर उसका उपयोग करने के लिए हमें आलस्य त्यागना होगा।
पुरुषार्थ
चुनौतियाँ मनुष्य को अपनी अज्ञात, अपरिमित शक्तियों के प्रति जागरुक बनाती हैं।
पुरुषार्थ
दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति आधा कार्य तो शुरू होने से पहले ही कर लिया करते हैं।
पुरुषार्थ
संकटों से कभी घबराना नहीं चाहिए क्योंकि काँटों में फूल खिलते हैं।
पुरुषार्थ
यदि आपके कार्य की नींव आपका आत्मविश्वास है तो आपके लिए कोई भी कार्य असंभव नहीं है।
पुरुषार्थ
अनिश्चित मन वाला पुरुष भी जब मन को एकाग्र करके सामना करने के लिए खड़ा होता है तो आपत्तियों का लहराता हुआ समुद्र भी शांत होकर बैठ जाता है।
पुरुषार्थ
विश्वास कार्य सिद्धि का पिता (जनक) है, इससे योग्यता को बल मिलता है जिससे शक्ति दुगुनी हो जाती है, मानसिक शक्तियों को सहारा मिलता है, वे पुष्ट हो जाती हैं जिससे कार्य में सफलता मिलती है।
पुरुषार्थ
'जीत' उपेक्षा, उलाहना और संघर्ष की सीढ़ियाँ चढ़ने के बाद ही हासिल होती है।
पुरुषार्थ
कठिनाइयाँ सफलता की पूर्व प्रवेश परीक्षा होती है।
पुरुषार्थ
असफलताओं से न घबराकर लगातार प्रयास करने वाले लोगों की गोद में सफलता खुद आ जाती है।
पुरुषार्थ
अच्छे अवसर को खो देना सफलता को खो देना है।
पुरुषार्थ
निर्बल होने पर भी अपना आत्मबल नहीं खोना चाहिए, आत्मबली अपने आत्मबल से सफलता प्राप्त कर लेता है।
पुरुषार्थ
ब्रह्ममुहूर्त में उठने का संकल्प लेना जीवन सफलता के लिए उपयोगी एवं आवश्यक मंत्र है।
पुरुषार्थ
तीन और तीन छह तो सभी करते हैं, पर आप कुछ ऐसा कीजिये जिससे वह तैंतीस बन सकें।
पुरुषार्थ
साहस दो प्रकार का होता है–एक तोप के सामने अड़ जाना और दूसरा आध्यात्मिक विश्वासों पर डँटे रहना।
पुरुषार्थ
संसार में आधे से अधिक लोग तो इसलिए असफल हो जाते हैं क्योंकि समय पर उनमें साहस का संचार नहीं हो पाता और वे भयभीत हो जाते हैं।
पुरुषार्थ
स्वतंत्रता जन्मसिद्ध अधिकार हो सकती है पर सफलता तो कर्मसिद्ध अधिकार ही है।
पुरुषार्थ
जो सूर्योदय के बाद भी सोये रहते हैं–उनका भाग्य भी सो जाता है और जो सूर्योदय के पूर्व उठते हैं, वे सूरज से चमकते हैं।
पुरुषार्थ
अपने कार्य व कर्त्तव्यों को इतने आनंदपूर्वक कीजिए कि वे स्वर्ग के द्वार बन जाएँ।
पुरुषार्थ
हाथ की रेखाएँ टेढ़ी देखकर निराश मत होइए, अपने नजरिये को बेहतर बनाकर मेहनत कीजिए हस्तरेखाएँ स्वतः बदल जाएगी।
पुरुषार्थ
श्रम से डरने वाला विश्राम नहीं पा सकता है
पुरुषार्थ
जो जवानी में श्रम नहीं करता उसे बुढ़ापे में विश्राम नहीं मिलता है।
पुरुषार्थ
चींटी से मेहनत सीखिये, बगुले से तरकीब और मकड़ी से कारीगरी, अपने विकास के लिए अंतिम समय तक संघर्ष कीजिए।
पुरुषार्थ
गुरु के क्लीनिक में पहुँचने मात्र से नहीं साधना से आत्म स्वस्थता प्राप्त होती है।
पुरुषार्थ
जब आप किसी काम की शुरूआत करें तो सफलता-असफलता से न डरें और काम को न छोड़ें। जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं, वे सबसे ज्यादा प्रसन्न रहते हैं।
पुरुषार्थ
'तीव्र इच्छा', 'लक्ष्य निर्धारण', आदर्श सामने हो, उद्देश्य प्राप्ति के लिए प्रतिदिन प्रयत्न करते रहो, उठो जाओ और तब तक न रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।
पुरुषार्थ
किसी वृक्ष को काटने के लिए आप मुझे छह घंटे दीजिए तो मैं पहले चार घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाऊँगा।
पुरुषार्थ
सप्ताह में अवकाश के दिन आने वाले महीने, वर्ष के कार्यों की योजना बना लेना चाहिए। ये राहें ले जायेगी मंजिल तक हौंसला रखो। कभी सुना अँधेरे ने सबेरा नहीं होने दिया।
पुरुषार्थ
अतिरिक्त प्रयास करने को अपनी दैनिक आदत का हिस्सा बना लें।
पुरुषार्थ
१६ वर्ष का भूखा बच्चा होटल पर गया, २५% कमीशन पर लगा, एक मिनी बस में गया बोला इमारत पुरानी है लेकिन स्वाद अच्छा है और सेवा भी अच्छी मिलेगी। धीरे-धीरे उस होटल का मैनेजर बना, आगे चाय बगान किराये पर लिए और पूरे देश में अपना चाय का साम्राज्य फैला दिया, उस बालक का नाम था Lipton यह था उसका कर्मयोग।
पुरुषार्थ
अमेरिका में एक युवक का विवाह २२वर्ष में हुआ, २४ वर्ष में तलाक, २७ वर्ष की उम्र में नगर अध्यक्ष का चुनाव हार गया फिर विधानसभा का चुनाव लड़ा, हार गया, कांग्रेस सीनेट का चुनाव लड़ा हार गया, ४६ वर्ष में उपराष्ट्रपति का चुनाव लड़ा हार गया लेकिन उस व्यक्ति ने हार नहीं मानी और ५२ वर्ष की उम्र में राष्ट्रपति का चुनाव जीता वह था अब्राहम लिंकन।
पुरुषार्थ
मंजिल उन्हीं को मिली है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता हौंसलों में उड़ान होती है ॥
पुरुषार्थ
लोग क्या सोचेंगे इस बात की चिंता करने के बजाय क्यों न कुछ ऐसा करने में समय लगाये जिसे प्राप्त करने पर लोग आपकी प्रशंसा करें।
पुरुषार्थ
निर्णय लेने में विफलता का भय नहीं बल्कि इतिहास बनाने का साहस हो।
पुरुषार्थ
एक दो बार किसी कारणवश नकारात्मक परिणाम आने पर रुकना नहीं है, उसका विवेचन कर उस गलती को सुधारकर आगे बढ़ना होगा।
पुरुषार्थ
पुरुषार्थी मनुष्य मात्र जो बोलने वाले हैं, उन पर अपना स्वामित्व जमा लेता है, मात्र वक्ता पुरुष पुरुषार्थियों का मनोरंजन करते हुए उपासना (प्रशंसा) करता है।
पुरुषार्थ
नीच विघ्न भय से कार्य प्रारम्भ नहीं करते हैं, मध्यम विघ्न आने पर छोड़ देते हैं उत्तम पुरुष बार-बार विघ्न आने पर भी प्रारम्भ किए कार्य को छोड़ते नहीं हैं।
पुरुषार्थ
अगर आप आलसी हो तो अकेले मत रहो, अकेले हो तो आलसी मत बनो।
पुरुषार्थ
कुछ कर गुजरने के लिए मौसम नहीं मन चाहिए, साधन सब जुट जाऐंगे, संकल्प का धन चाहिए।
पुरुषार्थ
शुरू में वह कीजिए जो आवश्यक है, फिर वह कीजिए जो संभव है और अचानक आप पायेंगे कि आप तो वह भी करने लग गये हैं जो असंभव था।
पुरुषार्थ
भोजन मिलता भाग्य से है पर पेट भरता पुरुषार्थ से ही है।
पुरुषार्थ
जिन्हें कुछ करना है उनके शब्दकोश में असंभव शब्द नहीं होना चाहिए बल्कि लक्ष्य के अनुरूप समय और श्रम अधिक होना चाहिए।
पुरुषार्थ
किस्मत भी तब रोती है जब मेहनत नहीं होती है।
पुरुषार्थ
संस्थापक बनना सरल है, पर व्यवस्थापक बनना कठिन है।
पुरुषार्थ
यदि आत्मोन्नति चाहते हो तो खाली मत बैठो, अपने कार्य में व्यस्त रहो।
पुरुषार्थ
दुनिया में कोई 'Impossible' काम नहीं बस होसला और मेहनत की जरूरत है 'I' 'M' 'Possible' को गौर से देखो वो खुद कहता है, मैं संभव हूँ।
पुरुषार्थ
किसी भी काम को लेकर ज्यादा संकोच और डर न रखें क्योंकि जिन्दगी एक प्रयोग है आप जितने ज्यादा प्रयोग करेंगे उतने बेहतर होते जायेंगे।
पुरुषार्थ
आपकी जिस काम में पहले से महारत है और उससे आगे बढ़कर अगर आपने कुछ अलग करने के प्रयास नहीं किए तो आप कभी आगे नहीं बढ़ पायेंगे।
पुरुषार्थ
तूफान का सामना करने के बाद ही कोई अच्छा कप्तान बनता है अतः आगे बढ़ने के लिए समस्याओं का सामना करना आवश्यक है।
पुरुषार्थ
कोई बड़ा काम करना है तो पहले थोड़ा गलत काम करें।
पुरुषार्थ
अज्ञान, प्रमाद या उपेक्षा से यदि कार्य नष्ट हो गया तो पुरुष का समस्त प्रयास निष्फल है।
पुरुषार्थ
सम्पूर्ण अनर्थों की जड़ प्रमाद वृत्ति है ''दीपक की तरह प्रकाश से अपना परिचय दो।''
पुरुषार्थ
शक्ति या बुद्धिमत्ता से नहीं, सतत् प्रयासों से ही हमारी क्षमताएँ सामने आती हैं।
पुरुषार्थ
कठिनाइयों से, प्रतिकूलताओं से घिरे होने पर भी जीवन का वास्तविक प्रयोजन समझने वाले व्यक्ति कभी निराश नहीं होते हैं, वे हर प्रकार की परिस्थितियों में अपने लक्ष्य के लिए प्रेरणा प्राप्त करते हैं तथा श्रेष्ठ पथ पर क्रमशः आगे बढ़ते हैं।
पुरुषार्थ
मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे।
पुरुषार्थ
मेहनत सीढ़ियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती है लेकिन सीढ़ियाँ हमेशा ऊँचाई की तरफ ले जाती हैं।
पुरुषार्थ
सौभाग्य को यदि ढूँढ़ो तो वह 'परिश्रम' के साथ खड़ा नजर आता है।
पुरुषार्थ
आपके ऊपर तब-तक कोई सवार नहीं हो सकता जब तक कि आपकी कमर झुकी न हो, इसलिए अपनी कमर सीधी करें और लक्ष्य के लिए काम करने में जुट जाएँ।
पुरुषार्थ