Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
कर्म

जलेन जनितः पङ्कः, जलेनैव शुद्ध्यति। चित्तेन जनितं कर्म, चित्तेन परिशुद्ध्यति॥

जल से उत्पन्न हुआ कीचड़ जल से ही शुद्ध होता है और मन से उत्पन्न हुआ पाप मन से पश्चाताप करने से ही शुद्ध हो जाता है और शरीर से किया हुआ पाप शरीर से तप करने पर ही शुद्ध होता है।

Mud produced by water is cleansed by water itself; sin produced by the mind is purified by mental repentance; and sin done by the body is purified only by bodily austerity.

— आराध्य सूत्र · #52

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