वाणी प्रतिद्वंदी द्वारा की गई प्रशंसा सर्वोत्तम कीर्ति है। Praise offered by a rival is the finest fame. — आराध्य सूत्र · #5966 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
दूसरों की निंदा और अपनी प्रशंसा करने से नीचगोत्र का बंध होता है और वह बंध दूसरे गुणस्थान तक ही होता है अतः निंदा करने वाला नियम से ही मिथ्यादृष्टि पापी है। वाणी 0 – भेजें