Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
भक्ति

जो मनुष्य नित्य ही पूजा करने के योग्य, अनेक जीवों के द्वारा अर्जित किए जाने वाले पुण्य के कारणभूत, अंगुष्ठ प्रमाण जिनेन्द्र प्रतिमा को बनाता है वह नित्य ही बहुत भारी पुण्य को प्राप्त होता है।

One who makes even a thumb-sized image of the Jinendra—worthy of daily worship and a source of the merit earned by many beings—attains great merit every day.

— आराध्य सूत्र · #5496

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हे जिनेन्द्र भगवान्! हे देवों के देव! बाल्यावस्था से आज तक आपके श्रीचरणों की सेवा में आसक्त शिष्यों को कल्पलता सम सेवा से जो काल व्यतीत हुआ है, आज उस सेवा का वह फल आपसे चाहता हूँ कि प्राणों के निकलते समय आपके नाम से सहित अक्षरों के पढ़ने में मेरा गला कुण्ठित न हो।
भक्ति