Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
Discernment (Vivek)

विवेक

522 सूत्र · पृष्ठ 2 / 7

जहाँ विवेक होता है वहाँ वेग नहीं काम करता, जहाँ वेग होता वहाँ विवेक नहीं होता है।
विवेक
करणीय अकरणीय का ज्ञान ही विवेक कहलाता है।
विवेक
सब प्रकार की क्रियाओं में विवेक प्रधान है।
विवेक
साधु साधना से दिव्य चिन्तामणि भी प्राप्त कर सकते और खली का टुकड़ा भी, अब विवेक उस साधक का है कि वह क्या प्राप्त करना चाहता है ?
विवेक
हमें शंका के आधार पर फैसला नहीं लेना चाहिए।
विवेक
हम जो भी करें उसमें हमें हेय-उपादेय का ज्ञान होना चाहिए।
विवेक
जहाँ अज्ञान वरदान हो वहाँ बुद्धिमानी दिखाना मूर्खता है।
विवेक
विवेक हीन व्यक्ति को केवल स्नेही होने के कारण गुप्त विचारना में सम्मिलित नहीं करना चाहिए।
विवेक
शंका के बादल विवेक के सूरज को ढँक देते हैं।
विवेक
पहले यह देख लें कि इस काम में लागत कितनी लगेगी, कितना माल खराब जायेगा और इसमें लाभ कितना होगा? बाद में उस काम को हाथ में लें।
विवेक
कुछ काम ऐसे हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए, उन्हें यदि तुम करोगे तो नष्ट हो जाओगे तथा कुछ काम ऐसे है कि जिन्हें करना ही चाहिए, यदि तुम उन्हें नहीं करोगे तो भी नष्ट हो जाओगे। जिसका तुम्हें उपकार करना है उसके स्वभाव का यदि तुम ध्यान न रखोगे, तो तुम भलाई करने में भी भूल कर सकते हो।
विवेक
अनजाने मनुष्य पर विश्वास करना और जाने हुए योग्य पुरुष पर संदेह करना; ये दोनों ही बातें एक समान अगणित आपत्तियों की जननी है।
विवेक
सहसा कम न करें, अविवेक मुसीबतों को आश्रय देता है, विचारशील मानव को गुणों से प्रेम करने वाली सम्पत्तियाँ खुद चुन लेती हैं।
विवेक
अपने रहस्यों को किसी के सामने प्रकट न करें, यह आदत आत्मघाती है।
विवेक
बुद्धिमान को एक व्यक्ति का त्याग कर कुल की, कुल का त्याग कर ग्राम की, एक ग्राम का त्यागकर देश की और पृथ्वी का त्याग कर अपने आप की रक्षा करना चाहिए।
विवेक
गुण दिखाई दें तो मन को कैमरा बना लीजिए, अवगुण दिखाई दें तो आईना।
विवेक
हमेशा छोटी-छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो क्योंकि इंसान पहाड़ों से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता है।
विवेक
एक बार इंसान ने कोयल से कहा—तू काली न होती तो कितनी अच्छी होती? फिर सागर से कहा तेरा पानी खारा न होता तो कितना अच्छा होता, फिर गुलाब से कहा—तुझमें काँटे न होते तो कितना अच्छा होता? तब तीनों एक साथ बोले हे इंसान! तुझमें दूसरों की कमियाँ देखने की आदत न होती तो तू कितना अच्छा होता?
विवेक
स्वयं के दोष देखने वाले को दूसरे के दोष देखने का समय ही नहीं मिलता है।
विवेक
किसी भी प्रकरण में गुणों पर दृष्टि रहे तो वह समय व्यर्थ गया नहीं कहलाता है।
विवेक
यदि आप बहुत अधिक लोगों पर निर्भर रहते हैं तो आपके निराश होने के अवसर अधिक होंगे।
विवेक
अपने परिणाम सुधारो, दूसरों को मत सुधारो, तीर्थंकर आदिनाथ अपने परिवार के मारीच को नहीं सुधार पाये, तो आप कैसे सुधार सकते हो।
विवेक
स्वयं का निर्णय ही सर्वोपरि होता है, पर के निर्णय से जीवन कष्टमय होता है।
विवेक
आसमान में उड़ने की मनाही नहीं, शर्त सिर्फ इतनी कि जमीन को नजर अंदाज न करें।
विवेक
निन्यानवें प्रतिशत अवस्थाओं में कोई भी मनुष्य स्वयं को दोषी नहीं ठहराता,चाहे उसकी कितनी भी भारी भूल क्यों न हो?
विवेक
दूसरों के दोष पर ध्यान देते समय हम स्वयं बहुत भले बन जाते हैं, पर जब हम अपने दोषों पर ध्यान देंगे तो अपने आपको कुटिल और कामी पायेंगे।
विवेक
यह भी बुद्धिमानी का एक काम है कि मनुष्य लोक रीति के अनुसार व्यवहार करें।
विवेक
क्रोध में जवाब ना दो, अधिक खुशी में वादा न करो, दुःखी मन से फैसला न करो।
विवेक
प्रायः समान विद्या वाले लोग एक दूसरे के यश से ईर्ष्या करते हैं। ईर्ष्या विवेक की विरोधी है।
विवेक
गुणग्राह्य दृष्टि व्यक्ति को श्रेष्ठता प्रदान करती है।
विवेक
जो दूसरों से सबक लेकर चेत जाता है, वही चतुर होता है।
विवेक
बिना सोचे-विचारे जल्दी से लिया गया निर्णय विनाशकारी होता है।
विवेक
आत्मा जिस कार्य से सहमत न हो, उस कार्य के करने में शीघ्रता न करो।
विवेक
निर्णय पर दवाब या प्रभाव हावी नहीं होना चाहिए।
विवेक
फैसला फासले से बेहतर होता है।
विवेक
बिना सोचे-विचारे जल्दी से लिया गया निर्णय विनाशकारी होता है।
विवेक
आत्मा जिस कार्य से सहमत न हो, उस कार्य के करने में शीघ्रता न करो।
विवेक
निर्णय पर दवाब या प्रभाव हावी नहीं होना चाहिए।
विवेक
संकट के स्थान में सहसा दौड़ पड़ना मूर्खता है, बुद्धिमानों का यह भी कहना है कि जिससे डरना चाहिए उससे डरते ही रहें।
विवेक
जो दूरदर्शी आदमी हर एक विपत्ति के लिए पहले से ही सचेत रहता है, वह उस वार से बचा रहेगा जो अतिभयंकर है।
विवेक
विद्या, तप, धन, शरीर, युवावस्था और उच्चकुल ये छह सज्जनों के लिए गुण और दुष्टों के लिए दुर्गुण हैं जिनके कारण विवेक के नष्ट होने पर अभिमानी और दोषपूर्ण दृष्टि वाले होकर वे दुष्ट लोग महापुरुषों की तेजस्विता को नहीं देख पाते हैं।
विवेक
मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र उसका विवेक और सत् (अच्छे) कार्य है।
विवेक
काम करने से पूर्व सोचना बुद्धिमत्ता है, कर्म करते समय सोचना सतर्कता है, काम कर चुकने पर सोचना मूर्खता है।
विवेक
एक ही पत्थर से दो बार टकराना मूर्खता है।
विवेक
यदि आप अच्छे अवसर गँवा देते हैं तो समझना आप महान् मूर्ख हैं।
विवेक
जो न चाहने वालों को चाहता है और चाहने वालों को त्याग देता है तथा जो अपने से बलवान वालों के साथ वैर बांधता है, उसे मूर्ख कहते हैं।
विवेक
विज्ञापन मूर्ख बनाने का सबसे अच्छा और सरल उपाय है।
विवेक
भ्रम ही भ्रमण का कारण है।
विवेक
अगर सेवक सुख चाहें, भिखारी मान चाहें, व्यसनी धन की इच्छा करें, व्यभिचारी शुभ गति चाहें, लोभी यश चाहें तो समझो कि ये लोग आकाश से दूध दुहना चाह रहे हैं।
विवेक
कोई मुझे एक बार धोखा दे तो उसे धिक्कार है कोई मुझे दो बार धोखा दे तो मुझे धिक्कार है क्योंकि मैं सचेत नहीं हुआ।
विवेक
मनुष्य से ये ही भूलें होती हैं कि वह दुनिया को सुधारना चाहता है, पर स्वयं सुधरना नहीं चाहता है।
विवेक
मूर्ख आदमी बिना बुलाए भीतर घुस आता है और बिना पूछे बोलने लगता है, जिस पर विश्वास नहीं करना चाहिए उसका विश्वास करता है।
विवेक
मूर्ख मनुष्य को सम्मान देना मानों सुअर के आगे मोती डालना है।
विवेक
जो आदमी न तो स्वयं भला बुरा पहचानता है और न ही दूसरों की सलाह मानता है वह जीवन भर अपने बन्धुओं के लिए दुःखदायी बना रहता है।
विवेक
जो मनुष्य शत्रु से मिले हुए मित्र को, कुल्टा स्त्री को, कुल को ध्वस्त करने वाले पुत्र को, मूर्ख मंत्री को, उतावली करने वाले राजा को, प्रमादी वैद्य को, रागी देव को, विषयी गुरु को और दया रहित धर्म को मोह वश नहीं छोड़ता वह कल्याण के द्वारा छोड़ दिया जाता है अर्थात् उसका कल्याण नहीं होता है।
विवेक
लोभी मनुष्य को धन से, अहंकारी को हाथ जोड़कर, मूर्ख को उसके इच्छानुकूल कार्य से, पंडित को भोजन से या यथार्थता से, शूद्र को शक्ति से, क्षत्रिय को सम्मान से, बच्चों को प्रेम-स्नेह से, स्त्री को उसकी प्रशंसा करके वश में करना चाहिए।
विवेक
लालची को धन देकर, मूर्ख को उपदेश देकर और विद्वान् को सत्य का ज्ञान कराकर वश में करना चाहिए।
विवेक
पागल हाथी से, क्रुद्ध सर्प से, भूखे सिंह से, मूर्ख नौकर से, व्याभिचारिणी स्त्री से, अहंकारी से, शरारती से, वैरी से, वैद्य से सदा सावधान रहें।
विवेक
धनवान आदमी, कुत्ता, सांड और शराबी इनसे सदा सावधान रहें।
विवेक
मनुष्य को कदापि समुद्र में स्नान नहीं करना चाहिए चाहे समुद्र में तरंगों का उठना युगों-युगों से बंद हो गया हो।
विवेक
जहाँ पर सम्मान नहीं, जीविका नहीं, बंधु नहीं और विद्या का लाभ भी नहीं वहाँ नहीं रहना चाहिए।
विवेक
दूसरों के दोषों पर ध्यान रखने वाला अपने पापों के प्रति अंधा हो जाता है।
विवेक
अपराध को दण्ड से नहीं, विवेक से रोको।
विवेक
अमीर लोगों की सिर्फ सुविधाएँ मत देखें उनके अन्दर की दुविधाएँ समझें, जिन्हें वे छिपाए बैठे हैं।
विवेक
जब कोई मनुष्य किसी दूसरे के दोषों पर अँगुली उठाता है तो उसे ध्यान रखना चाहिए कि उसकी शेष तीन अँगुलियाँ उसी की ओर संकेत कर रही होती हैं।
विवेक
दूसरे के गुण देखना-दोष न ढूँढ़ना उन्नति का मार्ग है।
विवेक
जो काम घड़ों जल से नहीं होता, उसे दवा के दो घूँट कर देते हैं।
विवेक
आत्मा जिस कार्य से सहमत नहीं, उस कार्य को करने में शीघ्रता मत करो।
विवेक
उसी कार्य को करना ठीक है जिसे करके पछताना न पड़े।
विवेक
जो काम वचन से नहीं हो पाता वह युक्ति से शीघ्र हो जाता है।
विवेक
बुद्धि यह है कि अपने कानों की अपेक्षा अपनी आँखों पर भरोसा करो।
विवेक
जो मनुष्य अपना भेद अपने सेवक को बताता है, वह सेवक को अपना स्वामी बना लेता है।
विवेक
वह भेद जिसे तुम गुप्त रखना चाहते हो, किसी से न कहो, चाहे वह तुम्हारा परम विश्वासी क्यों न हो, गुप्त बात को जितनी अच्छी तरह आप स्वयं छिपा सकते हैं, दूसरा न छिपा सकेगा।
विवेक
आपका विचार तभी तक आपका है जब तक आप दूसरों के सामने प्रकट न करो।
विवेक
विपत्ति के आने पर अपनी रक्षा के लिए व्यक्ति को अपने पड़ोसी शत्रु से भी मेल कर लेना चाहिए।
विवेक