Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

अगर सेवक सुख चाहें, भिखारी मान चाहें, व्यसनी धन की इच्छा करें, व्यभिचारी शुभ गति चाहें, लोभी यश चाहें तो समझो कि ये लोग आकाश से दूध दुहना चाह रहे हैं।

If a servant craves ease, a beggar craves honour, an addict craves wealth, an adulterer craves a good rebirth, and a greedy man craves fame, know that they are trying to milk the sky.

— आराध्य सूत्र · #2800

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक