Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

वीर्यवास- रज और वीर्य सर्वाङ्ग में रहते हैं, जैसे तिल में तैल, फूल में गन्ध, इसी तरह शरीर के कण-कण में वीर्य व्याप्त है।

The abode of virya: the vital fluids reside throughout the body; as oil in the sesame seed and fragrance in the flower, so virya pervades every particle of the body.

— आराध्य सूत्र · #91

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य