Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

मैथुन से शरीरिक हानि- शरीर में वीर्य शक्ति ही श्रेष्ठ है, वह शरीर का राजा है, जिस प्रकार राजा के विना राज्य में अन्याय-भ्रष्टाचार होने से राज्य निर्धन हो जाता है, उसी प्रकार वीर्य शक्ति के विना शरीर निस्तेज एवं निस्सार हो जाता है।

Physical harm from intercourse: the vital energy (virya) is the finest thing in the body, its king; just as a kingdom without a king falls into injustice and corruption and becomes impoverished, so without virya the body becomes lustreless and hollow.

— आराध्य सूत्र · #84

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य