Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ब्रह्मचर्य

वीर्य की बूँद निकालना याने शरीर को नीबू की भाँति निचोड़ना है, जैसे मथानी से दूध के परमाणु से मक्खन खींचा जाता है, उसी प्रकार हस्तमैथुन आदि से शरीर के सभी परमाणुओं से वीर्य खींचा जाता है नस-नस हिल जाती है जब तक दीपक में तैल ऊपर चढ़ता है तो दीपक प्रकाश करता है, जैसे ही तैल का नाश होता है दीपक मन्द होकर बुझ जाता है, उसी प्रकार जब तक शरीर में वीर्य ऊपर चढ़ता है तो शरीर में चमक, दमक, आनन्द बल दिखाई देता है।

To shed a drop of virya is to wring the body like a lemon; as churning draws butter from the particles of milk, so masturbation draws virya from every particle of the body and every nerve is shaken. As long as oil rises in the lamp it gives light, but as soon as the oil is spent the lamp dims and dies; likewise, as long as virya rises in the body there is radiance, glow, joy and strength.

— आराध्य सूत्र · #92

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जिसने वैराग्य रूपी तलवार के द्वारा इन्द्रियरूपी चोरों को नष्ट कर दिया उसको स्वर्ग मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैराग्य के बिना शरीर को दण्डित करना व्यर्थ है। जब चित्रादि में निर्मित स्त्री मन में क्षोभ उत्पन्न करती है तब स्त्री के संसर्ग और वार्तालाप में मन एकाग्र कैसे रह सकता है?
ब्रह्मचर्य